प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सक प्रशिक्षण देते हुए
विकासनगर
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अल्ट्रासाउंड तकनीक ने बीते कुछ वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। विशेषकर आपातकालीन और क्रिटिकल केयर मेडिसिन के क्षेत्र में इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी कड़ी में स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय, धर्मावाला में शनिवार से प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड एवं इको कार्यशाला की विधिवत शुरुआत की गई। यह कार्यशाला अस्पताल के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से आए 35 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य और महत्व
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन एवं गहन चिकित्सा सेवाओं में कार्यरत चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड से जुड़े उन्नत और व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना है। वर्तमान समय में जब गंभीर रूप से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तब त्वरित और सटीक निदान जीवन रक्षक सिद्ध हो सकता है। प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (POCUS) एक ऐसा बेडसाइड डायग्नोस्टिक टूल है, जो बिना समय गंवाए मरीज की स्थिति का आकलन करने में मदद करता है।
पहले दिन के सत्रों की रूपरेखा
कार्यशाला के पहले दिन व्याख्यान, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग सत्रों का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागी चिकित्सकों को हेमोडायनामिक मूल्यांकन, फेफड़ों का अल्ट्रासाउंड, इकोकार्डियोग्राफी, संवहनी पहुंच (Vascular Access) और प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से यह बताया गया कि किस प्रकार अल्ट्रासाउंड की मदद से आईसीयू में मरीज की वास्तविक समय (रियल टाइम) स्थिति की निगरानी की जा सकती है। प्रशिक्षण सत्रों में चिकित्सकों ने स्वयं उपकरणों का उपयोग कर अभ्यास भी किया, जिससे उनके कौशल में व्यावहारिक निखार आया।
डॉ. गीता जैन का वक्तव्य
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कहा कि प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड तेजी से विकसित हो रहा एक प्रभावी बेडसाइड डायग्नोस्टिक और थैरेप्यूटिक टूल है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन और क्रिटिकल केयर सेटिंग्स में यह तकनीक मरीजों की देखभाल को अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।
डॉ. जैन ने यह भी कहा कि इस प्रकार की अकादमिक गतिविधियां न केवल चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देती हैं, बल्कि सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning) को भी प्रोत्साहित करती हैं। इससे युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलता है, जो अंततः मरीजों के हित में जाता है।
क्रिटिकल केयर का अभिन्न अंग
सह्याद्री हॉस्पिटल, पुणे के इंटेंसिविस्ट फिजिशियन डॉ. प्रदीप डी’कोस्टा ने अपने संबोधन में कहा कि अल्ट्रासाउंड तकनीक अब क्रिटिकल केयर मेडिसिन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इसकी सहायता से त्वरित और सटीक निदान संभव है, जिससे उपचार की दिशा तुरंत तय की जा सकती है।
डॉ. डी’कोस्टा के अनुसार, अल्ट्रासाउंड का उपयोग न केवल निदान में बल्कि विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे संवहनी पहुंच स्थापित करना, छाती में ट्यूब डालना (चेस्ट ट्यूब इंसर्शन) और तरल संग्रह की पहचान में भी अत्यंत उपयोगी है। इससे जटिलताओं की संभावना कम होती है और मरीज की सुरक्षा बढ़ती है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी उपचार की गुणवत्ता
विशेषज्ञों ने बताया कि प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह रियल टाइम में मरीज की स्थिति का आकलन करने में सक्षम है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों में पल-पल बदलती स्थिति को समझने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। इससे चिकित्सक तुरंत निर्णय लेकर उपचार में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।
उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा
स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय में आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखंड के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल क्षेत्रीय चिकित्सकों को अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मरीजों तक पहुंच सके।
आयोजकों और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला के दौरान अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुज सिंघल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. ताराश्री सिंघल, डॉ. बनांबर रे, डॉ. केदार तोरास्कर, डॉ. सुनील करंथ, डॉ. रुचिरा खासने, डॉ. विक्रम गुप्ता, डॉ. विशाल भटनागर, डॉ. नंदन एस. बिष्ट और डॉ. वैभव प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
सभी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अल्ट्रासाउंड आधारित निर्णय लेने से मरीजों के उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
आयोजकों ने जानकारी दी कि कार्यशाला के आगामी सत्रों में और भी उन्नत विषयों को शामिल किया जाएगा। प्रतिभागी चिकित्सकों को जटिल क्लिनिकल केस स्टडीज के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकें।
कुल मिलाकर, स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय में शुरू हुई यह प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड एवं इको कार्यशाला न केवल चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह मरीजों के बेहतर और सुरक्षित उपचार की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी। अल्ट्रासाउंड तकनीक के बढ़ते उपयोग से आने वाले समय में क्रिटिकल केयर मेडिसिन और अधिक प्रभावी, सुलभ और जीवन रक्षक बन सकेगी।
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