“राज्यसभा सांसद नरेश बंसल हरिद्वार में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तराखण्ड की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए।”
देवभूमि रजत जयंती सप्ताह के अवसर पर हरिद्वार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने उत्तराखण्ड सरकार की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने राज्य की प्रगति को “संघर्ष से समृद्धि की ओर” यात्रा बताते हुए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख किया।
उत्तराखण्ड की 25 वर्ष की विकास यात्रा
हरिद्वार स्थित होटल प्रकाश में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद एवम् भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नरेश बंसल ने पत्रकारों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ने 25 वर्षों में वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना राज्य आंदोलनकारियों ने देखा था। समान नागरिक संहिता से लेकर रोजगार, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना विकास तक, राज्य ने कई राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य
नरेश बंसल ने बताया कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया। इसके अलावा राज्य में सशक्त भू कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं, जिससे शासन में पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन स्थापित हुआ है।
रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण में नई छलांग
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में 26,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी गईं, जबकि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के माध्यम से ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए। इनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है।
राज्य का बजट पहली बार ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंचा है, जो विकास की नई ऊँचाइयों की ओर इशारा करता है।
“राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय 17 गुना बढ़ी है,” — नरेश बंसल
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण योजनाएँ
महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए सांसद ने बताया कि सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण और सहकारी प्रबंध समितियों में 33% आरक्षण लागू किया गया है।
‘लखपति दीदी योजना’ के तहत अब तक 1.53 लाख महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री अंत्योदय निःशुल्क गैस रिफिल योजना के तहत करीब 2 लाख गरीब परिवारों को साल में 3 सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में सुधार
बंसल ने बताया कि अब तक 58 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख और परमवीर चक्र विजेताओं के लिए ₹1.5 करोड़ कर दी गई है।
मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2020-22 में 104 था जो घटकर 2021-23 में 91 पर आ गया है, जिससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार स्पष्ट झलकता है।
आधारभूत संरचना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
राज्य के धार्मिक और पर्यटन स्थलों को नए सिरे से विकसित किया जा रहा है।
केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान पर तेजी से कार्य जारी है। बद्रीनाथ धाम को ₹255 करोड़ की लागत से स्मार्ट आध्यात्मिक कस्बा के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके साथ ही, कुमाऊँ क्षेत्र में ‘मानसखण्ड मंदिर माला मिशन’ के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को सर्किट से जोड़ा जा रहा है।
सड़क और रेल संपर्क में भी तेजी से प्रगति हुई है —
दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड का निर्माण ₹13,000 करोड़ की लागत से जारी है, जिससे यात्रा समय 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा। वहीं, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का 70% कार्य पूरा हो चुका है।
पलायन रोकथाम और सीमांत गाँवों का विकास
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत युवाओं को कृषि, बागवानी, पर्यटन और होमस्टे से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।
अब तक करीब 2,000 लोगों ने रिवर्स पलायन करते हुए राज्य में स्वरोजगार अपनाया है।
वहीं, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत सीमांत के 51 गाँवों का चयन कर उनका सुनियोजित विकास किया जा रहा है।
देवभूमि उत्तराखण्ड अपने 25 वर्षों की विकास यात्रा में कई क्षेत्रों में अग्रणी रहा है — चाहे वह समान नागरिक संहिता का ऐतिहासिक निर्णय हो, रोजगार सृजन हो या महिला सशक्तिकरण। नरेश बंसल ने कहा कि यह उपलब्धियाँ राज्य के जन-जन के सहयोग और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम हैं।
आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखण्ड “मॉडल राज्य” बनकर देश के विकास में नई दिशा तय करे।
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