“देहरादून में उत्तराखंड रजत जयंती समारोह की तैयारियों का दृश्य – अधिकारी और लोक संस्कृति झांकी”
देहरादून में रजत जयंती उत्सव की तैयारियां तेज़, जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 स्वर्णिम वर्ष पूरे करने जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर राजधानी देहरादून में रजत जयंती समारोह की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। इस समारोह की भव्यता इसलिए भी खास होगी क्योंकि इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने आयोजन की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की और अधिकारियों को व्यवस्थाओं को “चाक-चौबंद” रखने के सख्त निर्देश दिए।
संघर्ष से सृजन तक का सफर
उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ था, जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर यह राज्य अस्तित्व में आया। बीते 25 वर्षों में उत्तराखंड ने विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क नेटवर्क के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
रजत जयंती समारोह इस पूरे सफर को सम्मानित करने और “संघर्ष से सृजन” की कहानी को प्रदर्शित करने का माध्यम बनेगा।
समारोह में राज्य के स्थापना संग्राम की झलक और लोक संस्कृति की झंकार देखने को मिलेगी, जो उत्तराखंड की आत्मा को दर्शाएगी।
जिलाधिकारी ने किया माइक्रो-लेवल प्लान तैयार
जिलाधिकारी सविन बंसल ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर सभी व्यवस्थाएं प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएं।
उन्होंने कहा कि मुख्य पंडाल, वीआईपी और वीवीआईपी सीटिंग अरेंजमेंट, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, जलपान, पेयजल, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन जैसे हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाए।
डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया कि पूरे आयोजन स्थल को अलग-अलग जोन और सेक्टर में विभाजित किया जाए और प्रत्येक सेक्टर में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए गए कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेक्टरवार पुलिस प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
स्वास्थ्य, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की तैयारियां भी पुख्ता
स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थल पर एम्बुलेंस और चिकित्सक टीम की तैनाती हो।
कार्यक्रम स्थल पर कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा, जहां 24 घंटे राजस्व उपनिरीक्षकों की टीम मौजूद रहेगी ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
डीएम ने कहा कि लोनिवि इंजीनियरों द्वारा कार्यक्रम स्थल का डिज़ाइन और लेआउट तैयार कर उसका सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि तैयारियों में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों ही प्राथमिकता पर होनी चाहिए ताकि कार्यक्रम जनता के लिए यादगार बने।
लोक संस्कृति और आधुनिक उपलब्धियों का संगम
रजत जयंती समारोह में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा और लोक कलाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही राज्य की विकास यात्रा और उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
डीएम बंसल ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं बल्कि नए संकल्पों का आरंभ होगा, जहां उत्तराखंड के अगले 25 वर्षों की दिशा तय की जाएगी।
अधिकारियों की उपस्थिति और समन्वय पर जोर
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरिगिरी, और एसडीएम कुमकुम जोशी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
डीएम ने निर्देश दिए कि अन्य जिलों से आने वाले नागरिकों के लिए आवास, यातायात और सुविधा केंद्रों की व्यवस्था पहले से तय की जाए।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य के गौरव का प्रतीक बनेगा और इसे एक “मॉडल इवेंट” के रूप में देखा जाएगा।
आंकड़ों के साथ उपलब्धियां
रजत जयंती अवसर पर सरकार राज्य के अब तक के विकास कार्यों का सार भी प्रस्तुत करेगी — जिसमें सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में की गई प्रगति को दर्शाया जाएगा।
रजत जयंती बनेगी नए उत्तराखंड का प्रतीक
उत्तराखंड की रजत जयंती केवल उत्सव नहीं बल्कि संघर्ष, संस्कृति और संकल्प का संगम है।
इस समारोह के ज़रिए न सिर्फ राज्य की उपलब्धियां दिखेंगी, बल्कि आने वाले समय के लिए विकास की नई राह भी तय होगी।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों से अपील की है कि वे इस आयोजन को जनभागीदारी और स्वच्छ आयोजन का उत्कृष्ट उदाहरण बनाएं।
