मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक लेते हुए
देहरादून ।
उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। यह स्पष्ट संदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिया। बैठक में मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य के समक्ष मौजूद प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन किया।
इस बैठक में राज्य की कानून व्यवस्था, पुलिसिंग, प्रशासनिक कार्यशैली, सुरक्षा प्रबंधन, पर्यटन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन व्यवस्था, कारागार सुधार, भूमि विवाद और जनशिकायत निवारण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन-प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनता के प्रति संवेदनशील, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी होकर कार्य करे।
उच्चस्तरीय बैठक में सभी जिलों के अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य सचिव सहित राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित शासन व्यवस्था नहीं चलेगी, बल्कि योजनाओं और निर्णयों का असर धरातल पर दिखना चाहिए।
पर्यटन बढ़ने की संभावना, व्यवस्थाएं समय से पूरी हों
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए पर्यटन स्थलों पर होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है।कैंची धाम बाईपास से मिलेगी बड़ी राहत मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि
कैंची धाम बाईपास का निर्माण कार्य जून माह तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूरा होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र में सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा।
पुलिस वर्क कल्चर में सुधार के निर्देश
पुलिस व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि थाना चौकिया सहित जमीनी स्तर पर पुलिस के वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम नागरिकों के साथ मानवीयता, संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
भूमि फ्रॉड पर सख्त कानून बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने राज्य में बढ़ते लैंड फ्रॉड के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने भूमि से जुड़े अपराधों पर कठोर कानून बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
अपराध नियंत्रण के लिए आत्ममंथन जरूरी
अपराध नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक आत्ममंथन भी आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन के सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
राजस्व व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व के वैकल्पिक स्रोत विकसित किए जाएं। सब्सिडी योजनाओं के आउटकम का मूल्यांकन किया जाए और राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की देरी न हो।
कानून व्यवस्था से समझौता नहीं
मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक कहा कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर त्वरित और गंभीर संज्ञान लिया जाए। कानून व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
जनशिकायत निवारण सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में सुनिश्चित किया जाए। योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर दिखाई दें। उन्होंने योजनाओं के नियमित भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
पुलिस विवेचना और रात्रि गश्त पर जोर
मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए और निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधों पर रोक लग सके।
नशा मुक्ति अभियान बने जन आंदोलन
नशा मुक्ति अभियान को लेकर मुख्यमंत्री ने इसे जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए, जिसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।
अभियोजन व्यवस्था पर सख्ती
अभियोजन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए, ताकि मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सके।
कारागार सुधार और बंदियों का पुनर्वास
कारागार विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बंदियों के लिए स्किल डेवलपमेंट, पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और मानवाधिकारों के सख्त पालन के निर्देश दिए।
अवैध निर्माण पर अधिकारियों की जवाबदेही तय
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी-नालों और सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों के लिए संबंधित एसडीएम, लेखपाल और पटवारी की जवाबदेही तय की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों और संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
भूमि विवादों का शीघ्र निस्तारण
तहसील स्तर पर गठित भूमि विवाद निस्तारण समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भूमि विवादों का शीघ्र निस्तारण
तहसील स्तर पर गठित भूमि विवाद निस्तारण समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।डिजिटल गवर्नेंस को गंभीरता से लागू करने के निर्देश डिजिटल गवर्नेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए। चारधाम यात्रा और सड़कों को लेकर निर्देश
चारधाम यात्रा की तैयारियों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। वहीं लोक निर्माण विभाग को 15 फरवरी तक सड़कों के डामरीकरण का कार्य शुरू करने और गुणवत्ता से समझौता न करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन सख्त निर्देशों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार कानून व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में इन निर्देशों का असर राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनविश्वास पर साफ दिखाई देने की उम्मीद है।
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