“परेड ग्राउंड में आंदोलनरत युवाओं से मिलते और सीबीआई जांच की घोषणा करते सीएम पुष्कर सिंह धामी”
देहरादून, 29 सितंबर 2025।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की हालिया परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को परेड ग्राउंड में आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच अचानक पहुंचे सीएम धामी ने इस प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि युवाओं के मन में किसी भी प्रकार का संदेह या शंका बनी रहे, इसलिए जांच को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
युवाओं की पारदर्शिता की मांग
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित परीक्षाओं में पिछले कुछ वर्षों में कई बार अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। 2022 में हुए पेपर लीक प्रकरण ने भी सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। इस बार अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ताज़ा परीक्षा में सामने आए संदेह ने युवाओं को आंदोलित कर दिया। परेड ग्राउंड में कई दिनों से छात्र और अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे।
घटना का विवरण: परेड ग्राउंड में युवाओं से सीधा संवाद
सोमवार दोपहर मुख्यमंत्री धामी बिना पूर्व सूचना के परेड ग्राउंड पहुंचे। वहां मौजूद युवाओं ने अपनी परेशानियां और मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। धामी ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में सरकार ने 25 हजार से अधिक सरकारी भर्तियां की हैं और उनमें किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई।
“सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड के युवाओं को किसी भी परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता का पूरा भरोसा मिले। युवाओं के मन में कोई संदेह नहीं रहना चाहिए।
सीएम का आधिकारिक बयान और आश्वासन
सीएम धामी ने कहा कि फिलहाल इस मामले की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी द्वारा की जा रही है और कमेटी अपना काम कर रही है। लेकिन युवाओं की लगातार मांग को देखते हुए सरकार अब सीबीआई जांच की संस्तुति करेगी ताकि हर कोण से निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान यदि किसी युवा पर मुकदमे दर्ज हुए हैं, तो उन्हें वापस लिया जाएगा।
स्थानीय असर: युवाओं में भरोसे का संचार
मुख्यमंत्री के इस कदम से आंदोलनरत युवाओं में राहत की लहर दौड़ गई। लंबे समय से धरना दे रहे छात्र अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल मौजूदा भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी बल्कि भविष्य की परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास भी बढ़ेगा।
आँकड़ों और पुरानी घटनाओं से तुलना
पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने 25,000 से अधिक भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की हैं हालांकि, 2022 के पेपर लीक मामले के बाद से भर्ती परीक्षाओं में युवाओं का भरोसा कई बार डगमगाया है। इस बार सीबीआई जांच की संस्तुति से सरकार की गंभीरता का संदेश स्पष्ट है।
मुख्यमंत्री की भावुक अपील
सीएम धामी ने कहा कि वे युवाओं के संघर्ष को समझते हैं और इसी कारण उन्होंने कार्यालय के बजाय खुद धरना स्थल पर आने का निर्णय लिया। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्वक आंदोलन करने की अपील की और कहा कि राज्य के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
“अमृतकाल के विकसित भारत में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी।”
परेड ग्राउंड पर मुख्यमंत्री की अचानक मौजूदगी और सीबीआई जांच की संस्तुति ने उत्तराखंड के युवाओं को राहत दी है। अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और उसके परिणामों पर टिकी होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से आने वाली भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को नया आयाम मिलेगा। सरकार और युवाओं दोनों को चाहिए कि इस प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और रचनात्मक बनाए रखें।
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