यूएसडीएमए में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण लेते प्रशिक्षु डिप्टी एसपी
आपदा प्रबंधन में पुलिस की भूमिका पर प्रदान की गई विस्तृत जानकारी
देहरादून । उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में वर्ष 2024 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी पुलिस अधीक्षकों के लिए एक विशेष एवं व्यापक अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षु अधिकारियों को राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली, संस्थागत ढांचे तथा आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में पुलिस विभाग की भूमिका से व्यावहारिक और नीतिगत दोनों स्तरों पर अवगत कराना था।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) की अवधारणा एवं संरचना, चेतावनी प्रसारण तंत्र, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
आपदा प्रबंधन प्रणाली की विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण सत्र में अधिकारियों को बताया गया कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा आने के बाद की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें आपदा पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, क्षमता विकास, त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा के बाद पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण शामिल होते हैं।
अधिकारियों को यह भी समझाया गया कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और वनाग्नि जैसी आपदाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों का आपदा प्रबंधन के प्रति सजग, प्रशिक्षित और तैयार रहना अत्यंत आवश्यक है।
आईआरएस और चेतावनी तंत्र की भूमिका
प्रशिक्षण के दौरान इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि आईआरएस एक ऐसी प्रणाली है, जो आपदा के समय विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी, कमांड और समन्वय स्थापित करती है।
साथ ही चेतावनी प्रसारण तंत्र के महत्व को भी रेखांकित किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों को यह जानकारी दी गई कि समय पर और सटीक चेतावनी प्रसारित कर आपदा से होने वाली जनहानि और संपत्ति नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एनडीएमए और यूएसडीएमए की भूमिका
कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की भूमिका, उनके नीतिगत दिशा-निर्देशों और राज्य स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया।
अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार केंद्र सरकार की नीतियां राज्य स्तर पर लागू की जाती हैं और किस तरह जिला प्रशासन एवं पुलिस इन नीतियों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एसईओसी और डीईओसी की कार्यप्रणाली
प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) की कार्यप्रणाली से भी रूबरू कराया गया। उन्हें बताया गया कि आपदा के समय ये केंद्र सूचना संग्रह, संसाधन प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए नोडल बिंदु के रूप में कार्य करते हैं।
आपदा प्रबंधन में पुलिस की संवेदनशील भूमिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण चक्र—आपदा पूर्व, आपदा के दौरान और आपदा के बाद—की प्रत्येक अवस्था में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील होती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल उन प्रमुख एजेंसियों में से एक होता है, जो सबसे पहले मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करता है। पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग देना भी उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
आपदा के समय पुलिस के प्रमुख दायित्व
सचिव विनोद कुमार सुमन ने विस्तार से बताया कि आपदा के समय पुलिस की भूमिका बहुआयामी होती है। इसमें प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना, लोगों की सुरक्षित निकासी (एवैक्यूएशन), भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, राहत सामग्री के निर्बाध वितरण में सहयोग, संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा, अफवाहों पर नियंत्रण और सटीक व प्रमाणिक सूचना का संप्रेषण शामिल है।
इसके अतिरिक्त प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन सेवाएं, एसडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी पुलिस की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
नेतृत्व और त्वरित निर्णय क्षमता पर जोर
सचिव आपदा प्रबंधन ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य में एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में आपदा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतिक और नेतृत्वकारी भूमिकाओं का निर्वहन करना होगा। आपदा के समय परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती हैं, ऐसे में डेडिकेशन, डिवोशन, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की कुंजी होती है।
उन्होंने कहा कि सही समय पर लिया गया एक निर्णय कई लोगों की जान बचा सकता है, इसलिए पुलिस अधिकारियों को मानसिक रूप से मजबूत और निर्णयात्मक रूप से सक्षम होना चाहिए।
प्रशिक्षण से मिलेगी जमीनी समझ
विनोद कुमार सुमन ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन की जमीनी और व्यावहारिक समझ प्रदान करेंगे। इससे वे भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमित प्रशिक्षण और अभ्यास से ही आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ. पीडी माथुर, मनीष भगत और डॉ. पूजा राणा ने भी आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न तकनीकी, प्रशासनिक और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
विशेषज्ञों ने वास्तविक आपदा घटनाओं के उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार समन्वय, टीमवर्क और समय पर की गई कार्रवाई से आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल प्रशिक्षु अधिकारी
कार्यक्रम में प्रशिक्षु डिप्टी एसपी दक्ष शोखंद, आदित्य तिवारी, लव शर्मा, दिव्येश उपाध्याय, अंकित थपलियाल, समीरण भट्ट, विनय सिंह, सुश्री अवनी तिवारी, सुश्री दीप्ति कैड़ा और सुश्री तनुजा बिष्ट उपस्थित रहे। सभी प्रशिक्षु अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में पहल
यूएसडीएमए द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस अधिकारियों को यदि आपदा प्रबंधन की समुचित जानकारी और नियमित प्रशिक्षण मिलता रहे, तो आपात स्थितियों में जनहानि और संपत्ति के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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