देहरादून परेड ग्राउंड में उपनल कर्मचारियों के समर्थन में भाषण देते सूर्यकांत धस्माना
देहरादून के परेड ग्राउंड में चल रहे उपनल कर्मचारियों के धरने को सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का समर्थन मिला। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ लेगी।
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत उपनल (Uttarakhand Purva Sainik Kalyan Nigam Limited) कर्मचारी कई वर्षों से समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।
साल 2018 में नैनीताल उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया था कि उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन दिया जाए और नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँ।
हालांकि, राज्य सरकार ने इस निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। अब उच्चतम न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा है, लेकिन सरकार ने अभी तक आदेशों का पालन नहीं किया है।
सोमवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में जारी उपनल कर्मचारियों के धरने में पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि अब सरकार को “आश्वासन नहीं, निर्णय” देना चाहिए।
उन्होंने कहा,
“माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया है, फिर भी सरकार हठधर्मिता दिखा रही है। अब यह लड़ाई निर्णायक होगी और इस बार कोई समझौता नहीं, सिर्फ समाधान चाहिए।”
धस्माना ने राज्य की भाजपा सरकार से मांग की कि तुरंत “समान कार्य के लिए समान वेतन” का शासनादेश जारी किया जाए और “चरणबद्ध नियमितीकरण योजना” की घोषणा की जाए ताकि वरिष्ठता के आधार पर कर्मचारियों को स्थायी किया जा सके।
धस्माना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निशाना साधते हुए कहा,
“मुख्यमंत्री कई बार मंचों से उपनल कर्मचारियों की मांगें मानने का वादा कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उपनल संगठन के साथ खड़ी है और जो भी रणनीति संगठन तय करेगा, कांग्रेस “कंधे से कंधा मिलाकर” कर्मचारियों का साथ देगी।
इस आंदोलन का असर राज्य के कई विभागों पर दिखने लगा है।
उपनल कर्मचारियों की संख्या राज्यभर में लगभग “____” (Placeholder) बताई जाती है।
साल 2018 के बाद से अब तक सरकार की ओर से “____” बार वार्ता की गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
अन्य राज्यों जैसे हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, जिससे उत्तराखंड में असंतोष बढ़ा है।
उपनल कर्मचारियों की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब न्यायालय तक ने उनके पक्ष में फैसला दिया है, तो सरकार को अब टालमटोल नहीं करनी चाहिए।
यदि सरकार जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रूप से बड़ा मसला बन सकता है।
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