स्यानाचट्टी आपदा पीड़ित प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करते हुए
सुरक्षात्मक कार्य की मांग को लेकर सीएम से मिला स्यानाचट्टी आपदा पीड़ित प्रतिनिधिमंडल…
नई टिहरी । उत्तराखंड के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपायों को लेकर एक बार फिर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। स्यानाचट्टी आपदा पीड़ित प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सुरक्षात्मक कार्य कराए जाने की मांग की। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल की ओर से मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा गया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि आपदा के कई महीने बीत जाने के बावजूद गीठ पट्टी क्षेत्र के स्यानाचट्टी और कुंसाला इलाकों में स्थायी सुरक्षा उपाय अब तक नहीं किए गए हैं।
आपदा के बाद भी नहीं हुए सुरक्षात्मक कार्य
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि गीठ पट्टी क्षेत्र में स्यानाचट्टी और कुंसाला क्षेत्र में आई भीषण आपदा के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। पहाड़ियों से गिरते मलबे, कमजोर हो चुके ढलान और क्षतिग्रस्त मार्गों के कारण स्थानीय लोगों को हर समय जान-माल के नुकसान का डर बना रहता है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य जैसे रिटेनिंग वॉल, सुरक्षात्मक दीवारें, ड्रेनेज सिस्टम और भूस्खलन रोकने के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले मानसून में क्षेत्र को फिर से भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
भविष्य में बड़े नुकसान की आशंका
ज्ञापन के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि सुरक्षात्मक कार्य न होने की स्थिति में भविष्य में बड़ी आपदा से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि आपदा के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी सर्वेक्षण कराकर वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षा कार्यों को धरातल पर उतारा जाए।
तीन गांवों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक और अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने आपदा से प्रभावित कुपड़ा, कुंसाला और तिर्खली गांवों की सुरक्षित आवाजाही शीघ्र बहाल करने की मांग रखी।
उन्होंने बताया कि आपदा के बाद से इन गांवों को जोड़ने वाले मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
यमुनाघाटी के लिए जीवनरेखा हैं ये मार्ग
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यमुनाघाटी क्षेत्र में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि जीवनरेखा हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से न केवल स्थानीय लोग प्रभावित होते हैं, बल्कि पर्यटन, तीर्थाटन और स्थानीय व्यापार भी ठप पड़ जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि इन मार्गों की मरम्मत और सुरक्षा को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। प्रतिनिधिमंडल की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपे गए ज्ञापन में सभी समस्याओं को विस्तार से उल्लेखित किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आश्वासन दिया।
हालांकि, आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को जल्द सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में कई सामाजिक और जनप्रतिनिधि शामिल रहे, जिनमें—
- तीर्थपुरोहित ज्योति प्रसाद उनियाल
- अध्यक्ष होटल एसोसिएशन यमुनाघाटी सोबन सिंह राणा
- कुपड़ा ग्राम प्रधान मनमोहन राणा
- प्रवीन राणा (रिंकू)
- चित्रमोहन राणा
- कुलदीप रावत
- यशवंत राणा
- दीपिन राणा
- सुनील राणा
- शत्रुघ्न राणा
- दिनेश राणा
आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
स्यानाचट्टी आपदा पीड़ितों और जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात के बाद सरकार ठोस और त्वरित कदम उठाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा, बल्कि दीर्घकालीन और स्थायी समाधान जरूरी है।
स्यानाचट्टी और आसपास के क्षेत्रों में आई आपदा ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और सुरक्षात्मक कार्य कितने जरूरी हैं। मुख्यमंत्री से की गई यह मुलाकात न केवल क्षेत्र की पीड़ा को सामने लाती है, बल्कि सरकार के लिए एक अहम चेतावनी भी है। अब देखना यह होगा कि सरकार कब तक इन मांगों को धरातल पर उतारती है।
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