सरस मेले में ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
देहरादून में चल रहे सरस मेले के नवें दिन मंगलवार को ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और निवेशकों को जोड़ने वाले कार्यक्रम ‘गुल्लक 2’ में भाग लिया, जहाँ 36.50 लाख रुपये के निवेश की वचनबद्धता जताई गई।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सरस मेले की भूमिका
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आज हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन समूहों को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाने के उद्देश्य से सरस मेला हर वर्ष आयोजित किया जाता है।
यह मेला न केवल स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार का मंच है बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर भी प्रदान करता है।
सरस मेले में ‘गुल्लक 2’ पहल ने खींचा ध्यान
देहरादून में मंगलवार को आयोजित सरस मेले के नवें दिन ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की गुणवत्ता, बिक्री और उद्यमशीलता के प्रयासों की सराहना की।
‘गुल्लक 2’ के तहत निजी व्यवसायियों और स्वयं सहायता समूहों के बीच निवेशक पिच सत्र आयोजित किया गया, जिसमें
- 45 विक्रेताओं और 22 निवेशकों ने भाग लिया,
- और भविष्य में ₹36.50 लाख निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई।
इस अवसर पर डेढ़ लाख रुपये से अधिक निवेश करने वाले 10 निवेशकों को चेक प्रदान किए गए और उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 स्वयं सहायता समूहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मंत्री गणेश जोशी ने क्या कहा?
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा —
“उत्तराखंड की संस्कृति सबसे समृद्ध और प्रेरणादायी है। आज 4.69 लाख से अधिक बहनें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही हैं। इन उत्पादों की गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।”
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की 3 करोड़ से अधिक बहनों को “लखपति दीदी” बनाया गया है। उत्तराखंड में अब तक 1.63 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का मंच
‘गुल्लक 2’ जैसे आयोजनों से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा अवसर मिला है। ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद जैसे—हस्तशिल्प, जैविक खाद्य सामग्री, पहाड़ी परिधान और जड़ी-बूटियों—को शहरों तक पहुँचाने का अवसर मिला है।
इससे स्थानीय बाजार में रोजगार और निवेश के नए अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।
ग्रामीण उद्यमिता का बढ़ता ग्राफ
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- वर्ष 2019 में जहां लगभग 2.8 लाख महिलाएं SHG से जुड़ी थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या 4.69 लाख से अधिक हो चुकी है।
- राज्य सरकार के अनुसार, ‘लखपति दीदी’ योजना से जुड़ी महिलाओं की आय में [DATA_REQUIRED]% की बढ़ोतरी हुई है।
‘गुल्लक 2’ पहल को मिली सराहना
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ‘गुल्लक 2’ एक अभिनव पहल है, जो लघु और मध्यम उद्यमियों को परामर्श, पूंजी और बाजार की उपलब्धता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मददगार सिद्ध होगी।
उन्होंने कहा,
“यह पहल उत्तराखंड के ग्रामीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसके माध्यम से छोटे उद्यमियों को भी बड़े बाजारों से जोड़ा जा सकेगा।”
जिलाधिकारी ने बताई उपलब्धियां
जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने जानकारी दी कि सरस मेले में अब तक डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हो चुकी है। मेला 6 अक्टूबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक चलेगा।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों का उत्साह देखने योग्य है।
आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम
सरस मेला और गुल्लक 2 जैसी पहलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिला है, बल्कि निवेशकों का भी विश्वास बढ़ा है।
मंत्री गणेश जोशी की मौजूदगी और राज्य सरकार की योजनाओं ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं।
