रुद्रप्रयाग में BIS द्वारा आयोजित हॉलमार्किंग जागरूकता कार्यशाला"
हॉलमार्किंग क्यों है जरूरी?
सोने और चांदी के आभूषण खरीदते समय ग्राहकों को अक्सर शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर संदेह रहता है। ऐसे में हॉलमार्किंग (Hallmarking) ही एकमात्र प्रमाणिकता है जो उपभोक्ता और व्यापारी दोनों के बीच विश्वास कायम करती है। इसी उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) देहरादून द्वारा रुद्रप्रयाग में एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में स्वर्णकार व्यापारी, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक मौजूद रहे। कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य था – ग्राहकों और व्यापारियों को हॉलमार्किंग के महत्व और नए नियमों के बारे में विस्तार से जानकारी देना।
कार्यशाला में क्या हुआ?
रुद्रप्रयाग मुख्यालय स्थित गुलाबराय के कस्तूरी इन होटल में आयोजित इस कार्यशाला में BIS देहरादून के निदेशक सौरभ तिवारी ने हॉलमार्किंग से जुड़ी गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि –
- अब चांदी के आभूषणों पर HUID आधारित हॉलमार्किंग अनिवार्य है।
- सोने में पहले केवल 14, 18 और 22 कैरेट शामिल थे, लेकिन अब 9 कैरेट को भी जोड़ा गया है।
- हॉलमार्किंग लागू होने से व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास मजबूत होगा।
BIS का उद्देश्य और संदेश
भारतीय मानक ब्यूरो का मानना है कि आभूषणों की शुद्धता की गारंटी देना अब केवल व्यापारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि ग्राहकों को भी हॉलमार्किंग की पहचान करनी चाहिए।
संयुक्त निदेशक सचिन चौधरी ने बताया कि –
- ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि बिना हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
- हॉलमार्किंग उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाती है और सोने-चांदी की शुद्धता का वैज्ञानिक प्रमाण देती है।
प्रशासन की भूमिका
जिला कलेक्ट्रेट सभागार में भी BIS ने अधिकारियों और आम जनता को हॉलमार्किंग और BIS मानकों के बारे में जागरूक किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि –
- सभी विभागीय कार्यों में BIS मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- इससे न केवल आभूषणों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि जनपद की सेवा वितरण प्रणाली भी और सुदृढ़ होगी।
इस कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण लोग मौजूद रहे –
- मुख्य अतिथि: पूनम कठैत (जिला पंचायत अध्यक्ष)
- विशिष्ट अतिथि: महावीर पंवार, अंकुर खन्ना (व्यापार मंडल अध्यक्ष)
- जिला महामंत्री: चन्द्र मोहन सेमवाल
- स्वर्णकार यूनियन के प्रतिनिधि: रिंकू वर्मा, विपिन वर्मा, राकेश वर्मा
- BIS टीम और प्रशासनिक अधिकारी
हॉलमार्किंग से उपभोक्ताओं को क्या लाभ?
हॉलमार्किंग केवल एक सरकारी नियम नहीं, बल्कि ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए लाभदायक है।
- शुद्धता की गारंटी – हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोने-चांदी का आभूषण कितना शुद्ध है।
- धोखाधड़ी से बचाव – ग्राहक को नकली या कम कैरेट का सोना मिलने की संभावना घट जाती है।
- पारदर्शी व्यापार – व्यापारी और ग्राहक के बीच आपसी विश्वास बढ़ता है।
- निवेश की सुरक्षा – हॉलमार्क वाला सोना लंबे समय तक मूल्यवान और सुरक्षित निवेश माना जाता है।
- सरकारी निगरानी – BIS के नियमों से आभूषण उद्योग अधिक पारदर्शी और नियंत्रित होता है।
ग्राहकों के लिए जरूरी बातें
यदि आप सोने या चांदी के आभूषण खरीद रहे हैं, तो हमेशा इन बातों का ध्यान रखें:
- HUID नंबर जरूर जांचें। यह एक यूनिक कोड होता है जो हर आभूषण पर दर्ज रहता है।
- केवल BIS प्रमाणित ज्वेलर्स से ही आभूषण खरीदें।
- खरीद के समय बिल और हॉलमार्क प्रमाण पत्र अवश्य लें।
- 9, 14, 18, 22 कैरेट में से अपने बजट और आवश्यकता अनुसार कैरेट चुनें।
व्यापारियों के लिए संदेश
कार्यशाला में BIS अधिकारियों ने व्यापारियों को भी कई निर्देश दिए –
- हर आभूषण की बिक्री से पहले उसकी हॉलमार्किंग कराना अनिवार्य है।
- नकली हॉलमार्क वाले आभूषण बेचने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।
- व्यापारियों को ग्राहकों को हॉलमार्किंग की जानकारी देनी चाहिए।
जागरूकता ही सुरक्षा
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही रहा कि – हॉलमार्किंग की जानकारी केवल व्यापारियों के लिए नहीं, बल्कि ग्राहकों के लिए भी अनिवार्य है। अगर ग्राहक जागरूक होगा, तो धोखाधड़ी की संभावना घटेगी और देशभर में आभूषण व्यापार ज्यादा पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगा।
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