ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निरीक्षण
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निरीक्षण
ऋषिकेश। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे सलीम अहमद ने ऋषिकेश से देवप्रयाग तक विभिन्न निर्माण स्थलों का जायजा लेते हुए परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रेल परियोजना पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल मॉडल पर विकसित की जा रही है, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
हरित क्षेत्र विकास पर विशेष जोर
सीएमडी सलीम अहमद ने कहा कि सुरंगों और अन्य निर्माण कार्यों के कारण यदि कहीं हरित क्षेत्र प्रभावित होता है, तो उसकी भरपाई ग्रीन बेल्ट विकास और व्यापक पौधरोपण के माध्यम से की जाएगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय नुकसान की क्षतिपूर्ति करना परियोजना की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ पारिस्थितिकी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान दिया जाए।
2028 तक हर हाल में कमिशनिंग के निर्देश
रेल परियोजना की समीक्षा बैठक में सीएमडी ने साफ कहा कि गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही परियोजना को वर्ष 2028 तक हर हाल में कमिशन करना अनिवार्य है।
उन्होंने इंजीनियरों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के लिए अनुशासन और तीव्र गति से काम करने के निर्देश दिए।
इंजीनियरों और विशेषज्ञों को दिए अहम सुझाव
निरीक्षण के दौरान सलीम अहमद ने इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए, जिनमें प्रमुख रूप से—
- निर्धारित समय सीमा में तीव्र गति से निर्माण कार्य
- कार्यों में उच्च गुणवत्ता और दीर्घकालिक सुरक्षा
- पर्यावरण और पारिस्थितिकी संरक्षण
- आधुनिक मशीनों और तकनीकों का अधिकतम उपयोग
- श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रतिबद्धता
शामिल है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित श्रमिक ही मजबूत परियोजना की नींव होते हैं।
हिमालयी क्षेत्र में परियोजना बड़ी चुनौती
सीएमडी सलीम अहमद ने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण हिमालयी क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां कई प्राकृतिक और भौगोलिक चुनौतियां सामने आती हैं। इनमें—
- गहरी घाटियां
- कमजोर और टूटी-फूटी चट्टानें
- जल रिसाव की समस्या
- अत्यधिक मौसम परिवर्तन
- भूकंपीय संवेदनशीलता
- दूरस्थ और दुर्गम स्थल
प्रमुख हैं। इन सभी चुनौतियों का सामना आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से किया जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से हो रहा निर्माण
परियोजना में विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें—
- टनल बोरिंग मशीन (TBM)
- स्वचालित ड्रिल जंबो
- रोबोटिक पीएलसी सिस्टम
- नियंत्रित शॉटक्रिट तकनीक
- उन्नत डी-वाटरिंग व्यवस्था
- पाइप रूफिंग तकनीक
- रसायनिक एवं सीमेंट ग्राउडिंग
- भूकंपरोधी सुरंग और पुल डिजाइन
शामिल हैं। इन तकनीकों से न केवल निर्माण कार्य सुरक्षित होगा, बल्कि परियोजना की आयु और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी, उप महाप्रबंधक ओपी मालगुडी सहित परियोजना से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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