“देहरादून में राष्ट्रीय पोषण माह 2025 के समापन समारोह में मंत्री सावित्री ठाकुर सम्मान वितरित करते हुए।”
देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय पोषण माह 2025 का समापन समारोह जनभागीदारी और पोषण क्रांति का प्रतीक बना। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि “पोषण केवल कार्यक्रम नहीं, यह हर माँ और बच्चे के प्रति राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।”
प्रधानमंत्री मोदी के ‘पोषण अभियान’ से लेकर जन आंदोलन तक
राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च 2018 को की थी, जिसका उद्देश्य था – “सशक्त नारी, सुपोषित भारत।”
तब से यह अभियान एक कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन बन गया है, जिसमें सरकार, समाज और नागरिकों की साझा भागीदारी शामिल है।
हर साल सितंबर माह को “राष्ट्रीय पोषण माह” के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बाल, मातृ और किशोर स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
देहरादून में सम्पन्न हुआ समापन समारोह
देहरादून के हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार की राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या, कृषि मंत्री गणेश जोशी, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव लव अग्रवाल, सचिव चंद्रेश कुमार यादव और संयुक्त सचिव राधिका झा भी शामिल रहे।
यह आयोजन 13 से 16 अक्टूबर 2025 तक चला और इसमें पोषण जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि सावित्री ठाकुर का संबोधन
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा —
“पोषण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह भारत के हर बच्चे और माँ के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।”
उन्होंने बताया कि जीवन के पहले 1000 दिन बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
सावित्री ठाकुर ने कहा कि इस वर्ष का पोषण माह खास रहा क्योंकि इसमें पुरुषों और युवाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
उन्होंने कहा —
“आज के सुपोषित बच्चे ही 2047 के सशक्त भारत के नागरिक होंगे।”
सावित्री ठाकुर ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जनसहयोग का भी आह्वान किया।
मिशन पोषण 2.0: डिजिटल भारत के साथ ‘सुपोषित भारत’ की दिशा में कदम
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि देशभर में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा —
“पोषण ट्रैकर ऐप ने सेवा वितरण में पारदर्शिता और दक्षता लाई है।”
- 13 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन प्रदान किए गए हैं।
- 13.87 लाख केंद्रों पर ग्रोथ मॉनिटरिंग उपकरण उपलब्ध हैं।
- 2 लाख केंद्रों को “सक्षम आंगनवाड़ी” के रूप में उन्नत किया जा रहा है।
एनएफएचएस-5 के अनुसार,
- ठिगनापन 38.4% से घटकर 35.5% हुआ है।
- कम वजन की दर 35.8% से घटकर 32.1% पर आई है।
रेखा आर्या और गणेश जोशी के वक्तव्य
राज्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा —
“पोषण ट्रैकर ने जमीनी स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता को नया आयाम दिया है।”
वहीं गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनीमिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा —
“स्थानीय अनाज और पारंपरिक भोजन भारत की पोषण आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं।”
स्थानीय उत्पादों को मिला प्रोत्साहन
कार्यक्रम में उत्तराखंड महिला सशक्तिकरण विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का सावित्री ठाकुर ने अवलोकन किया।
उन्होंने स्थानीय मिलेट्स (कोदों, कांवणी, झंगोरा) से बने उत्पादों की सराहना की।
साथ ही पोषण चैंपियंस और मिशन शक्ति चैंपियंस को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत ₹1.56 करोड़ की डीबीटी राशि 5211 लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी का संदेश
समारोह में प्रसारित वीडियो संदेश में अन्नपूर्णा देवी ने कहा —
“हर माँ सशक्त हो, हर बच्चा स्वस्थ हो — यही पोषण अभियान का लक्ष्य है।”
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के धार से इस वर्ष अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था —
“स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार और विकसित भारत — यही अमृतकाल का मंत्र है।”
केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि यह केवल समापन नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का आरंभ है, जो देश के हर घर तक पहुँचना चाहिए।
राष्ट्रीय पोषण माह का यह संस्करण भारत को “कुपोषण से पोषण की ओर” ले जाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
