मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करते माउंट एवरेस्ट विजेता सचिन कुमार, देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सोमवार को माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले 16 वर्षीय पर्वतारोही सचिन कुमार ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने सचिन की इस साहसिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचना उत्तराखंड और देश के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिन कुमार ने मुलाकात की।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने सचिन को शुभकामनाएँ देते हुए कहा,
“इतनी कम उम्र में एवरेस्ट जैसी विश्व की सबसे ऊँची चोटी को फतह करना साहस और दृढ़ निश्चय का अद्भुत उदाहरण है। सचिन ने न केवल अपने परिवार और प्रदेश का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।”
सीएम धामी ने सचिन की यात्रा और उनके संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि,
“उत्तराखंड की भूमि वीरता और पराक्रम की भूमि है। प्रदेश के युवा निरंतर विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम ऊँचा कर रहे हैं। राज्य सरकार पर्वतारोहण, खेल और साहसिक गतिविधियों में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ चला रही है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार प्रतिभाशाली युवाओं को हरसंभव सहायता और प्रोत्साहन देगी ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर सकें।
सचिन कुमार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कहा कि,
“मुख्यमंत्री जी से मिलना मेरे लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है। उनकी शुभकामनाएँ मेरे आत्मविश्वास को और बढ़ाती हैं। मैं आगे भी देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहूँगा।”
सचिन ने यह भी बताया कि एवरेस्ट अभियान के दौरान उन्हें अत्यधिक ठंड, तेज़ हवाओं और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
सचिन की इस उपलब्धि ने उत्तराखंड के युवाओं में साहसिक खेलों के प्रति रुचि को और बढ़ा दिया है।
कई स्कूल और खेल संस्थाएँ अब पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों को अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने पर विचार कर रही हैं।
स्थानीय लोगों में भी गर्व और उत्साह का माहौल है — सचिन के परिवार और गाँव में इस उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।
उत्तराखंड से अब तक “____” पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट फतह की है, लेकिन 16 वर्ष की आयु में यह सफलता दुर्लभ मानी जाती है।
पिछले दशक में राज्य के पर्वतारोहण संस्थानों में युवाओं की भागीदारी में लगभग 35% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रदेश में साहसिक खेलों के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।सचिन कुमार की यह सफलता न सिर्फ उनके साहस की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि उम्र नहीं, जज़्बा मायने रखता है।
मुख्यमंत्री धामी का प्रोत्साहन निश्चित रूप से राज्य के अन्य युवाओं को भी अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देगा।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश से निकला यह युवा पर्वतारोही आने वाले वर्षों में और भी ऊँचाइयाँ छूने को तैयार है।
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