लंढौरा में विध्यांचल एकेडमी इंटर कॉलेज के गेट पर ताला और बाहर खड़े छात्र
रुड़की के लंढौरा कस्बे में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व विधायक के समर्थकों ने किराया विवाद के चलते विद्यालय में घुसकर बच्चों, शिक्षकों और स्टाफ को जबरन बाहर निकाल दिया और स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। सूचना पर पहुँची पुलिस ने ताला तुड़वाकर बच्चों को कक्षाओं में वापस भेजा।
लंढौरा का विघ्यांचल एकेडमी इंटर कॉलेज विवाद में
लंढौरा कस्बे के मोहल्ला किला में स्थित विध्यांचल एकेडमी इंटर कॉलेज पिछले लगभग 12 वर्षों से संचालित है। यह विद्यालय स्थानीय क्षेत्र में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जहाँ लगभग 300 छात्र अध्ययनरत हैं।
हाल के दिनों में विद्यालय भवन के किराए को लेकर विवाद बढ़ गया था। बताया जा रहा है कि यह इमारत पूर्व विधायक से संबंधित है, और पिछले कुछ वर्षों से स्कूल प्रबंधन की ओर से किराया नहीं दिया गया, जिसके चलते तनाव की स्थिति बनी हुई थी।
कैसे हुआ पूरा मामला
सोमवार सुबह चार–पांच लोग स्कूल परिसर में पहुंचे और मौजूद कुछ बच्चों, शिक्षकों और प्रबंधक को जबरन बाहर निकाल दिया। इसके बाद उन्होंने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया, जिससे बच्चे बाहर खड़े रह गए।
इसी दौरान जैसे-जैसे अन्य बच्चे और अभिभावक पहुँचे, मौके पर भीड़ बढ़ने लगी। स्कूल परिसर के बाहर अफरातफरी का माहौल बन गया और अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।
सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुँची। पुलिस की मौजूदगी में ताला तोड़कर बच्चों को पुनः कक्षाओं में भेजा गया। यह कार्रवाई लगभग एक घंटे तक चली।
क्या बोले स्कूल प्रबंधक
विद्यालय प्रबंधक दिनेश ठाकुर ने बताया कि,
“हमारा स्कूल 10–12 वर्षों से इसी स्थान पर संचालित है। पिछले कुछ महीनों से किराए को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। हम किराया देना चाहते हैं, लेकिन संपत्ति संस्था के नाम पर है, इसलिए स्पष्ट नहीं है कि किराया किसे दिया जाए।”
दिनेश ठाकुर ने आगे कहा कि चार–पांच लोगों ने किराया न देने का हवाला देते हुए स्कूल पर ताला लगा दिया और स्टाफ को बाहर निकाल दिया। उन्होंने इसे “बच्चों की शिक्षा से खिलवाड़” बताया।
बच्चों की पढ़ाई पर संकट
घटना के कारण सुबह की कई कक्षाएँ प्रभावित हुईं। लगभग 300 छात्र, जिनमें 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षार्थी भी शामिल हैं, को घंटों तक स्कूल के बाहर इंतजार करना पड़ा।
अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएँ बच्चों के भविष्य पर गहरा असर डाल सकती हैं
कई स्थानीय लोगों का कहना था कि विवाद चाहे जो भी हो, स्कूलों को राजनीति या निजी झगड़ों से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका खामियाजा नाबालिग बच्चों को भुगतना पड़ता है।
पहले भी शिक्षा संस्थानों पर विवाद
यह पहली बार नहीं है जब रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में स्कूलों को लेकर विवाद हुआ हो।
पिछले दो वर्षों में हरिद्वार ज़िले में करीब 7 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें किराया या भूमि स्वामित्व विवाद के चलते स्कूलों की गतिविधियाँ प्रभावित हुईं।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इससे लगभग 2500 से अधिक छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
शिक्षा व्यवस्था में स्थायित्व की ज़रूरत
लंढौरा की यह घटना यह दर्शाती है कि शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है।
प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसी स्थितियों में तुरंत हस्तक्षेप करे ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
जनता और प्रबंधन दोनों को विवादों का कानूनी और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
