लक्सर में शुगर मिल के बाहर ओवरलोड गन्ना लादे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां।
लक्सर के गन्ना बेल्ट इलाकों में आरटीओ की निष्क्रियता के चलते निजी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ओवरलोड गन्ना ढुलाई का अवैध कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है। शुगर मिल तौल केंद्रों पर यह प्रथा बिना रोकटोक जारी है, जिससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
गन्ना परिवहन में नियम और हकीकत में बड़ा फर्क
राज्य परिवहन विभाग ने सितंबर 2025 में आदेश जारी किया था कि निजी और गैर-व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग केवल कृषि कार्यों के लिए ही किया जाएगा। माल ढुलाई के लिए केवल कमर्शियल वाहनों को अनुमति दी गई थी। आदेश में यह भी स्पष्ट था कि यदि किसी मिल में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित मिल संचालक पर कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे एकदम उलट है। गन्ना सीजन शुरू होते ही निजी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से गन्ना ढुलाई का सिलसिला बढ़ गया है। परिवहन विभाग की निगरानी नदारद है और इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
बिना परमिट के दौड़ रहीं सैकड़ों ट्रॉलियां
लक्सर की रायबहादुर नारायण सिंह शुगर मिल और आसपास के तौल केंद्रों पर रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां 300 से 400 क्विंटल तक गन्ना लादकर पहुंच रही हैं।
इन वाहनों की वास्तविक क्षमता 50 से 60 क्विंटल तक ही होती है, लेकिन बिना परमिट और ओवरलोड स्थिति में ये तेज़ रफ्तार से सड़कों पर दौड़ते हैं।
कई बार ये वाहन बिना रिफ्लेक्टर, हेडलाइट या सेफ्टी संकेतों के चलते हैं, जिससे अंधेरे में हादसे आम हो गए हैं।
स्थानीय किसान ने बताया, “मिलों से भुगतान में देरी होती है, इसलिए हम खुद गन्ना ढोने को मजबूर हैं, लेकिन आरटीओ की आंखों पर पट्टी बंधी है। एक छोटी गलती से बड़ी दुर्घटना हो सकती है।”
शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
सामाजिक कार्यकर्ता “——” ने बताया कि तौल पर्चियों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की जगह ट्रक नंबर दर्ज किए जा रहे हैं ताकि कागज़ों में सब कुछ वैध दिखे। उन्होंने यह भी कहा, “यह अवैध प्रक्रिया आरटीओ की मिलीभगत के बिना संभव नहीं। हमने जिलाधिकारी को शिकायत दी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
परिवहन विभाग के सूत्रों का कहना है कि “गन्ना सीजन में अतिरिक्त स्टाफ की कमी के कारण निगरानी पर असर पड़ा है,” लेकिन विशेषज्ञ इसे विभाग की लापरवाही मानते हैं।
सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था चरमराई
लक्सर में तौल केंद्रों के बाहर जगह की कमी से ट्रॉलियां सड़क पर कतार में खड़ी रहती हैं, जिससे कई बार एक किलोमीटर तक लंबा जाम लग जाता है।
स्कूल बसें, एंबुलेंस और आम यात्री घंटों फंसे रहते हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि हाईवे पर जाम की वजह से माल ढुलाई में भी दिक्कत हो रही है।
हाल ही में इसी क्षेत्र में एक ओवरलोड ट्रैक्टर के पलटने से बिजली पोल टूट गया था, जिससे आधा इलाका घंटों तक बिजली रहित रहा। यह उदाहरण बताता है कि खतरा कितना बड़ा है।
पुरानी घटनाओं से तुलना
पिछले वर्ष भी हरिद्वार और लक्सर क्षेत्र में ऐसे कई हादसे दर्ज किए गए थे, जिनमें ओवरलोड ट्रैक्टरों के पलटने से जान-माल का नुकसान हुआ।
2024 के गन्ना सीजन में परिवहन विभाग ने 85 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सीज किया था, लेकिन इस बार अब तक कोई प्रमुख कार्रवाई नहीं हुई।
नियमों का पालन ही सड़क सुरक्षा की कुंजी
लक्सर में गन्ना ढुलाई का यह अवैध खेल केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर गंभीर खतरा है।
यदि समय रहते आरटीओ और जिला प्रशासन सख्ती नहीं दिखाते, तो आने वाले दिनों में बड़े हादसे निश्चित हैं।
सरकार को चाहिए कि आदेशों का सख्ती से पालन कराए और गैर-व्यावसायिक वाहनों के अवैध उपयोग पर त्वरित रोक लगाए, ताकि किसानों की मेहनत और जनता की सुरक्षा दोनों बची रह सकें।
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