हरिद्वार जिले के लक्सर कोतवाली के बाहर फर्जी पत्रकारों की बढ़ती गतिविधियों ने प्रशासन और स्थानीय मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। आरोप है कि कुछ लोग पत्रकार बनकर पीड़ितों से उगाही कर रहे हैं। इस पर स्थानीय प्रेस संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पत्रकारिता की गरिमा पर संकट
पत्रकारिता समाज का चौथा स्तंभ मानी जाती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में फर्जी पत्रकारों की संख्या में इजाफा हुआ है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की आसान पहुँच ने ऐसे लोगों को अवसर दिया है जो बिना किसी मान्यता या प्रशिक्षण के “पत्रकार” की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।
लक्सर जैसे कस्बों में ये समस्या और गहरी हो गई है, जहां थानों और कोतवाली के बाहर फर्जी पहचान वाले लोग सक्रिय हैं।
कैसे चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल
लक्सर (फ़रमान खान): स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से एक दर्जन से अधिक फर्जी पत्रकार लक्सर कोतवाली के बाहर सक्रिय हैं।
ये लोग खुद को विभिन्न न्यूज चैनलों और अखबारों का प्रतिनिधि बताकर वहां आने वाले पीड़ितों से संपर्क करते हैं।
एक पीड़ित ने बताया —
“ये लोग कोतवाली के बाहर घूमते रहते हैं और छोटे-मोटे मामलों में भी हजारों रुपये वसूल लेते हैं। जब हम असली पुलिसवालों से बात करने जाते हैं, तो ये बीच में आकर डराते-धमकाते हैं।”
सूत्रों के मुताबिक, ये फर्जी पत्रकार दावा करते हैं कि “पैसे देने पर मामला सुलझा देंगे” या “खबर चलाकर दबाव बनाएंगे।”
पुलिस और पत्रकार संगठनों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पत्रकारों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को ज्ञापन भेजा है।
प्रेस क्लब के अध्यक्ष ने कहा —
“ये फर्जी तत्व असली पत्रकारों की मेहनत को बेकार कर रहे हैं। शासन को ऐसे लोगों के आईडी कार्ड और गतिविधियों की जांच करवानी चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकार समुदाय सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा।
वहीं, पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया —
“कोतवाली क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है और संदिग्ध तत्वों की पहचान की जा रही है। पीड़ितों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की धमकी की शिकायत सीधे थाने में दर्ज कराएं।”
आम जनता और पत्रकारिता पर असर
लक्सर के स्थानीय लोगों और व्यापारी संगठनों में भी इस गिरोह को लेकर रोष है।
लोगों का कहना है कि कोतवाली आने वाले पीड़ितों के साथ धोखाधड़ी हो रही है, जिससे असली पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कई स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी गिरफ्तारियां
यह मामला नया नहीं है। हरिद्वार जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।
- मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने एक “स्टिंग ऑपरेशन” के नाम पर उगाही करने वाले तथाकथित पत्रकार को दो साथियों सहित गिरफ्तार किया था।
- पथरी पुलिस ने “दिल्ली क्राइम रिपोर्टर” के नाम से फर्जी पहचान बनाकर वसूली करने वाले गिरोह को पकड़ा था।
- लक्सर क्षेत्र में पहले भी पाँच फर्जी पत्रकारों को दुकानों में अनधिकृत चेकिंग करते हुए पकड़ा गया था।
इन घटनाओं से साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी के बावजूद ऐसे गिरोह लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं।
पारदर्शिता और सतर्कता ही समाधान
लक्सर में सक्रिय फर्जी पत्रकारों का यह नेटवर्क केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की साख का भी सवाल है।
यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो इससे न केवल जनता का भरोसा डगमगा सकता है, बल्कि असली पत्रकारों की मेहनत पर भी पानी फिर सकता है।
सभी पक्षों को मिलकर ऐसी गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना होगा ताकि पत्रकारिता की गरिमा सुरक्षित रहे और पीड़ितों को न्याय मिल सके।
