पतनजलि योगपीठ और सेना अधिकारियों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर का दृश्य"
हरिद्वार से एक बड़ी और सराहनीय पहल सामने आई है। पतंजलि योगपीठ ने देश के भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की है। सोमवार को पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के क्षेत्रीय निदेशक कर्नल जितेंद्र कुमार और योगग्राम के सेवा प्रमुख स्वामी आर्यदेव के बीच इस संबंध में एक अनुबंध पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अनुबंध के अनुसार अब देशभर के लगभग 60 लाख भूतपूर्व सैनिक और उनके परिवारजन पतंजलि योगपीठ में योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के जरिए पूरी तरह नि:शुल्क इलाज प्राप्त कर सकेंगे।
समझौते की खास बात यह है कि इस योजना के तहत इलाज पर किसी भी प्रकार की लागत की सीमा तय नहीं की गई है। यानी चाहे मरीज को छोटे स्तर का उपचार चाहिए या बड़े स्तर का, पतंजलि योगपीठ द्वारा दी जाने वाली सेवाएं पूरी तरह मुफ्त होंगी। इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान उत्तराखंड सब एरिया (जेओसी) के मेजर जनरल एमपीएस गिल, जिन्हें भारतीय सेना के विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है, भी उपस्थित रहे। साथ ही योगगुरु बाबा रामदेव भी इस मौके पर मौजूद थे और उन्होंने एमओयू पर हस्ताक्षर के उपरांत फाइलों का आदान-प्रदान किया।
योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि यह पहल देश की सेना के उन जांबाज सैनिकों और उनके परिवारों के लिए समर्पित है जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ हमेशा देशहित और समाजहित में कार्य करता आया है और यह नई पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं कर्नल जितेंद्र कुमार ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे लाखों भूतपूर्व सैनिक और उनके परिजन लाभान्वित होंगे और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी आर्थिक बोझ के मिल सकेंगी।
मेजर जनरल एमपीएस गिल ने कहा कि देश की सेना हमेशा सीमाओं पर डटकर खड़ी रहती है और सैनिक अपने जीवन का हर पल देश की सेवा में न्यौछावर करते हैं। ऐसे में पतंजलि योगपीठ द्वारा उनके लिए मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना एक अत्यंत सराहनीय कार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से अन्य संस्थाएं भी प्रेरणा लेंगी और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए ऐसी ही योजनाएं लागू करेंगी।
पतनजली योगपीठ द्वारा दी जाने वाली यह मुफ्त स्वास्थ्य सेवा न सिर्फ सैनिकों के लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए भी होगी। इसका मतलब है कि सैनिकों की पत्नी, बच्चे और माता-पिता तक आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ उठा सकेंगे। पतंजलि ने स्पष्ट किया है कि इलाज के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा और मरीजों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस अवसर पर योगग्राम के सेवा प्रमुख स्वामी आर्यदेव ने कहा कि पतंजलि सदैव भारत के गौरव को बढ़ाने और समाज के कल्याण के लिए कार्यरत रहा है। यह पहल भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी है। उन्होंने बताया कि पतंजलि योगपीठ में पहले से ही देशभर से हजारों लोग आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के जरिए स्वास्थ्य लाभ लेने आते हैं और अब इस सुविधा का विस्तार भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिजनों तक किया गया है।
कुल मिलाकर यह समझौता भारतीय सेना के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का एक प्रतीक है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगी बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों के मनोबल को भी मजबूत करेगी। भूतपूर्व सैनिकों के लिए पतंजलि योगपीठ की यह योजना स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है और आने वाले समय में लाखों लोग इसका लाभ उठाएंगे।
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