“हरिद्वार प्रेमनगर घाट पर प्रतिबंधित भोजन पकाने वाले युवक पर पुलिस की कार्रवाई।”
हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र में पुलिस ने प्रतिबंधित भोजन तैयार कर शांति भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई प्रेमनगर घाट पर यात्रियों की शिकायत के बाद की गई।
धार्मिक नगरी हरिद्वार में प्रतिबंधित भोजन पर सख्त नियम
हरिद्वार धार्मिक और तीर्थ नगरी होने के कारण यहाँ सार्वजनिक स्थलों पर मांसाहारी या प्रतिबंधित भोजन तैयार करना या परोसना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रेमनगर घाट जैसे स्थल जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, वहाँ धार्मिक आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में जिला प्रशासन और पुलिस ने ऐसे मामलों में कई बार कार्रवाई की है ताकि शांति और धार्मिक सौहार्द बनाए रखा जा सके।
प्रेमनगर घाट पर यात्रियों ने जताया रोष
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दिनांक 5 नवम्बर 2025 को ज्वालापुर पुलिस को सूचना मिली कि प्रेमनगर घाट पर एक व्यक्ति प्रतिबंधित भोजन तैयार कर रहा है, जिससे आसपास के श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और आरोपी को हिरासत में लिया।
आरोपी की पहचान रोहित कुमार यादव, पुत्र निरंजन कुमार यादव, निवासी पावनधाम, हरिद्वार (वर्तमान पता—प्रेमनगर पुल, ज्वालापुर) के रूप में हुई।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई धारा 107/116 सीआरपीसी (शांति भंग) के तहत की गई।
“” (पुलिस अधिकारी का आधिकारिक बयान यहाँ जोड़ा जाएगा जब उपलब्ध हो)।
त्वरित कार्रवाई से रोका विवाद बढ़ने से
घटना की सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक समीप पाण्डेय और कांस्टेबल संजय राणा की टीम मौके पर पहुँची।
उन्होंने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया और प्रतिबंधित भोजन तैयार करने वाले व्यक्ति को पकड़ लिया।
स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि अगर कार्रवाई में देरी होती, तो विवाद बढ़ सकता था और शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।
श्रद्धालुओं ने जताई राहत और संतोष
प्रेमनगर घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने इस घटना पर नाराजगी जताई, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से माहौल शांत हो गया।
हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों पर इस तरह की घटनाएं धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुँचा सकती हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन ने निगरानी और सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया है।
यात्रियों ने कहा कि घाटों पर CCTV कैमरे और चौकी गश्त और बढ़ाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
धारा 107/116 सीआरपीसी क्या कहती है
धारा 107/116 सीआरपीसी के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है,
“यदि उसके कार्यों से सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना हो या समाज में अशांति फैलने का खतरा हो।”
यह एक निवारक (Preventive) कार्रवाई मानी जाती है, जिसका उद्देश्य विवाद या झगड़े को पहले ही रोकना है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयाँ
हरिद्वार पुलिस समय-समय पर प्रतिबंधित भोजन, गंगा किनारे असामाजिक गतिविधियों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मामलों में सख्त रुख अपनाती रही है।
2024 में भी इसी तरह की घटना में हर की पौड़ी क्षेत्र में दो व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई थी।
इन कदमों का उद्देश्य तीर्थनगरी की आध्यात्मिक और धार्मिक पवित्रता बनाए रखना है।
धार्मिक स्थलों पर अनुशासन और आस्था का संतुलन जरूरी
हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों में श्रद्धा और सामाजिक शांति दोनों का सम्मान आवश्यक है।
इस तरह की घटनाएँ न केवल कानून का उल्लंघन करती हैं, बल्कि आस्थाओं को भी आहत करती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी हरकतों पर शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति अपनाई जाएगी।
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