“हरिद्वार पुलिस द्वारा रात में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर टेप लगाते हुए अधिकारी”
हरिद्वार में बढ़ते कोहरे और रात में कम विजिबिलिटी को देखते हुए यातायात पुलिस ने रात्रि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े स्तर पर रिफ्लेक्टर टेप अभियान शुरू किया है। गन्ने की गाड़ियों, ट्रैक्टर-ट्रॉली और धीमी गति वाले वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाकर दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
सर्दियों में हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में घना कोहरा आम बात है। राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों पर विजिबिलिटी कई बार 10–20 मीटर तक गिर जाती है, जिससे दुर्घटनाएँ बढ़ जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि दिसंबर से फरवरी के बीच सड़क हादसों में लगभग “” प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जाती रही है। ऐसे में प्रशासन के लिए रात के समय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अनिवार्य हो जाता है।
भारतीय सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार धीमी गति वाले वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाना दुर्घटना-रोधी उपायों में बेहद आवश्यक है। हरिद्वार जिले में गन्ने की ढुलाई का सीजन शुरू होते ही ग्रामीण मार्गों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या भी बढ़ जाती है, जो कोहरे में बड़े खतरे का कारण बनती हैं।

SSP हरिद्वार के निर्देश पर यातायात पुलिस रुड़की और हरिद्वार क्षेत्र में रात्रि सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाया गया।
इस दौरान पुलिस टीमों ने रात के समय सड़कों पर गश्त करते हुए—
- गन्ने से भरी गाड़ियों
- ट्रैक्टर-ट्रॉली
- लोडिंग रिक्शा
- तथा अन्य धीमी गति वाले वाहनों
पर रिफ्लेक्टर टेप लगाए।
यह टेप दूर से ही वाहन को स्पष्ट दिखाने में मदद करता है, जिससे पीछे से आने वाले वाहन चालकों को पर्याप्त समय पर ब्रेक और दिशा बदलने का मौका मिलता है।
अभियान में पुलिस ने चालक और किसानों को यह भी बताया कि बिना रिफ्लेक्टर चलना कानूनन गलत है और इससे उनकी जान के साथ-साथ अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।

पुलिस के मुताबिक यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, विशेषकर दिसंबर–जनवरी के कोहरे वाले महीनों में।
यातायात पुलिस अधिकारियों ने बताया,
“”。
साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि रिफ्लेक्टर टेप लगाने का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि सड़क पर हर व्यक्ति की जान की रक्षा करना है।
अभियान का सीधा प्रभाव हरिद्वार व रुड़की के ग्रामीण और हाईवे रूट्स पर देखा जा रहा है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि रिफ्लेक्टर लगाने से रात के समय गाड़ियों पर पहचान बढ़ी है और हादसे की आशंका कम हुई है।
परिवहन विभाग के अनुसार—
- रात में ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर वाले मामले
- ओवरटेकिंग के दौरान होने वाली दुर्घटनाएँ
- हाईवे पर अचानक ब्रेक से लगने वाली श्रंखला-दुर्घटनाएँ
जैसी घटनाएँ कोहरे के दिनों में अधिक बढ़ जाती थीं।
अभियान से इन जोखिमों में कमी की उम्मीद जताई जा रही है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में हरिद्वार जिले में सड़क हादसों का आंकड़ा “” था, जिनमें से लगभग “” प्रतिशत मामले कम विजिबिलिटी के कारण हुए।
डाटा के अनुसार—
- रात में बिना रिफ्लेक्टर चलने वाली ट्रॉलियों से जुड़े हादसे कुल दुर्घटनाओं का एक बड़ा हिस्सा होते हैं।
- रिफ्लेक्टर उपयोग करने से पीछे से होने वाली टक्कर लगभग 40% तक कम की जा सकती है (सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार)।
इस वर्ष हरिद्वार पुलिस ने समय रहते अभियान शुरू कर दिया है, जिससे दुर्घटना ग्राफ में गिरावट की उम्मीद है।
हरिद्वार पुलिस का रिफ्लेक्टर टेप अभियान सर्दी के मौसम में सड़क सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कोहरा चाहे जितना भी घना हो, यदि वाहन स्पष्ट दिखें तो हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने वाहनों पर रिफ्लेक्टर अवश्य लगवाएँ और रात व कोहरे में धीमी गति से सुरक्षित ड्राइव करें।
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