“हरिद्वार विकास भवन में सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र मनरेगा समीक्षा बैठक में निर्देश देते हुए।”
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में हरिद्वार विकास भवन सभागार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यों की गुणवत्ता, जनसहभागिता, अतिक्रमण हटाने और सिंचाई सुविधा बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मनरेगा की समीक्षा बैठक में पारदर्शिता पर जोर
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बैठक में कहा कि मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की रीढ़ है।
उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि युवाओं को मनरेगा के अधिक से अधिक कार्यों से जोड़ा जाए ताकि स्वरोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ सकें।
“मनरेगा के कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर दिखाई दें और जनता उनकी सराहना करे।”
– डॉ. ललित नारायण मिश्र, मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार
सिंचाई और जल संरक्षण पर विशेष फोकस
बैठक में सीडीओ ने निर्देश दिया कि हर ग्राम पंचायत में सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए।
इसके लिए मनरेगा और अन्य विभागों के बीच केन्द्राभिसरण (convergence) और युगपतिकरण (integration) की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि अमृत सरोवर परियोजनाएँ ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण और खेती की स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
सीडीओ मिश्र ने सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिए कि गांवों और पंचायतों में अतिक्रमण की पहचान कर उसे हटाने की कार्रवाई तेज करें।
उन्होंने कहा कि एसडीएम के साथ संयुक्त अभियान चलाकर दोबारा अतिक्रमण न होने दें और सभी चकरोड़ (ग्राम मार्ग) को खाली कराया जाए।
“सरकारी भूमि और चकरोड़ों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों में बाधा न आए।” – डॉ. ललित नारायण मिश्र
अमृत सरोवर और अन्य परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक के दौरान मनरेगा स्कीम के तहत चल रही अमृत सरोवर परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों की भी गहन समीक्षा की गई।
सीडीओ ने कहा कि सभी कार्य पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएँ। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीण जनता तक पहुँचे।
बैठक में मौजूद अधिकारी
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, खंड विकास अधिकारी बहादराबाद मानस मित्तल, बीडीओ भगवानपुर आलोक गार्गेय, तथा जिले के सभी ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारी, उप कार्यक्रम अधिकारी और मनरेगा कर्मी उपस्थित रहे।
सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मनरेगा कार्यों की निगरानी करें और मासिक प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करें।
स्थानीय प्रभाव: पारदर्शिता और रोजगार सृजन की दिशा में कदम
हरिद्वार जिले में मनरेगा योजना का प्रभाव पहले से ही हजारों परिवारों तक पहुंच रहा है।
सीडीओ के नए निर्देशों के बाद योजना की पारदर्शिता और कार्य की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
अतिक्रमण हटाने और सिंचाई व्यवस्था के सुधार से किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
मनरेगा योजना की महत्ता
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) वर्ष 2005 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है।
यह योजना न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे और जल संरक्षण कार्यों में भी अहम भूमिका निभाती है।
हरिद्वार में पिछले कुछ वर्षों में मनरेगा के तहत अमृत सरोवर, चकरोड़ निर्माण, नालों की सफाई, और पौधारोपण जैसे कार्य सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य
पिछले वर्षों की तुलना में 2025 में हरिद्वार जिले में मनरेगा कार्यों की गति बढ़ी है।
हालांकि, योजना के क्रियान्वयन और पारदर्शिता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बनी हुई है।
सीडीओ की समीक्षा बैठक इस दिशा में नीतिगत सुधार और बेहतर निगरानी का संकेत देती है।
पारदर्शी मनरेगा से सशक्त ग्रामीण विकास की ओर
हरिद्वार में आयोजित यह समीक्षा बैठक मनरेगा की दिशा को और मजबूत करेगी।
डॉ. ललित नारायण मिश्र के निर्देशों से साफ है कि प्रशासन जनसहभागिता, पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
यदि निर्देशों का पालन सही ढंग से हुआ, तो हरिद्वार जल्द ही मनरेगा क्रियान्वयन में एक मॉडल जिला बन सकता है।
