“हरिद्वार में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा”
हरिद्वार में गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ललित नारायण मिश्रा ने जल जीवन मिशन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में पाया गया कि 57 ग्राम पंचायतों में योजनाओं के कार्य अभी भी अधूरे हैं। इस पर सीडीओ ने गहरी नाराजगी जताते हुए परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जल जीवन मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में इस मिशन के तहत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है।
हरिद्वार जनपद में बीते दो वर्षों से कई परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जिनमें पाइप लाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक निर्माण, पंपिंग स्टेशन और जल परीक्षण जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। हालांकि, कुछ तकनीकी बाधाओं और विभागीय विलंब के कारण कई कार्य अब भी पूर्ण नहीं हो सके हैं।

14 नवंबर 2025 को विकास भवन स्थित सभागार में सीडीओ ललित नारायण मिश्रा की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट में यह सामने आया कि:
- जनपद की 57 ग्राम पंचायतों में कार्य अभी भी लंबित है।
- कई परियोजनाओं का प्रमाणिकरण (Verification) समय पर नहीं हुआ।
- थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन के अभाव में कई पूर्ण कार्यों की फाइनल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।
इन बिंदुओं पर सीडीओ ने कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
(अधिकारिक बयान)
सीडीओ ललित नारायण मिश्रा ने बैठक में स्पष्ट कहा—
“किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लंबित परियोजनाओं का कार्य शीघ्रातिशीघ्र पूरा कराया जाए। जो कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनका थर्ड-पार्टी सत्यापन कराते हुए प्रमाणपत्र तुरंत उपलब्ध कराया जाए।”
उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी को यह भी निर्देशित किया कि
“परियोजनाओं में मौजूद गैप को प्राथमिकता से पूरा किया जाए, ताकि हरिद्वार को राज्य रैंकिंग में शीर्ष पाँच जिलों में शामिल किया जा सके।”
(स्थानीय जनता पर प्रभाव)
लंबित परियोजनाओं के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में:
- अभी भी नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं हुए हैं।
- जल आपूर्ति बाधित होने से दैनिक कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- कई जगहों पर अस्थायी टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी है।
- स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्वच्छ जल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
यदि परियोजनाएँ समय पर पूर्ण हो जाती हैं, तो हजारों ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
(पिछली प्रगति से तुलना)

पिछले वर्ष की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार—
- हरिद्वार में लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिए गए थे।
- शेष बचे कार्यों में से अधिकांश 2025 की शुरुआत में पूर्ण होने थे, परंतु तभी से लगभग 57 ग्राम पंचायतों में कार्य अटके हुए हैं।
राज्य के अन्य जिलों—देहरादून, नैनीताल और उधमसिंह नगर—ने अपने अधिकांश कार्य समय पर पूर्ण कर लिए हैं। हरिद्वार को टॉप-5 में लाने के लिए इन लंबित परियोजनाओं का समयबद्ध समाधान बेहद आवश्यक है।
हरिद्वार में जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब सभी लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए। सीडीओ द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों से उम्मीद है कि कार्य में तेजी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों को शीघ्र स्वच्छ पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विलंब की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
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