भगवानपुर ग्राम टकाबरी रविदास आश्रम में पुलिस जांच करती हुई टीम
उत्तराखंड के भगवानपुर क्षेत्र के ग्राम टकाबरी स्थित रविदास आश्रम में महंत की गुमशुदगी और बाद में हुई हत्या के मामले ने पूरे जनपद में सनसनी फैला दी है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार पुलिस ने जांच को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
एसएसपी नवनीत सिंह ने इस संवेदनशील मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 06 सदस्यीय एसआईटी गठित करने के आदेश जारी किए हैं। पुलिस के अनुसार, कोतवाली भगवानपुर क्षेत्रांतर्गत रविदास आश्रम, ग्राम टकाबरी में निवासरत महंत की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद जब शव बरामद हुआ, तो मामले को तरमीम करते हुए मुकदमा अपराध संख्या 85/26 धारा 103(1), 238, 61(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। महंत की संदिग्ध परिस्थितियों में गुमशुदगी और फिर हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। इसी क्रम में एसएसपी ने उच्चस्तरीय जांच के लिए एसआईटी के गठन का निर्णय लिया।
गठित एसआईटी का नेतृत्व शेखर चंद सुयाल, एसपी देहात, करेंगे। टीम में विभिन्न स्तरों के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि जांच के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण बिंदु छूट न जाए। एसआईटी में सीओ से लेकर आरक्षी स्तर तक कुल छह सदस्य शामिल हैं।
टीम में शामिल अधिकारियों में सीओ मंगलौर अभिनय चौधरी, निरीक्षक राजीव रौथांण, उप निरीक्षक नीरज रावत, उप निरीक्षक बालाराम जोशी, आरक्षी संजय पंवार और आरक्षी उवैदुल्ला शामिल हैं। यह टीम तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, घटनास्थल की फोरेंसिक जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संभावित आपराधिक षड्यंत्र के पहलुओं पर व्यापक जांच करेगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक दंपति सहित तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रारंभिक पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, हालांकि पुलिस ने जांच की गोपनीयता को देखते हुए विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी सभी संभावित कारणों—व्यक्तिगत रंजिश, आर्थिक विवाद या अन्य किसी आपराधिक साजिश—को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच करेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महंत लंबे समय से आश्रम में रहकर धार्मिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी प्रतिष्ठा थी। ऐसे में उनकी हत्या की खबर से ग्रामीणों में आक्रोश और शोक दोनों का माहौल है। कई सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
एसएसपी नवनीत सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता है कि घटना के पीछे की वास्तविक साजिश का खुलासा किया जाए और सभी दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाए।
जांच टीम आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जांच विधियों दोनों का उपयोग कर रही है। घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों को फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया है। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और यदि किसी के पास मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी हो तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।
यह मामला न केवल एक आपराधिक घटना है, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण सामाजिक संवेदनशीलता भी रखता है। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। एसआईटी के गठन से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए प्रतिबद्ध है।
आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच दिशा और गिरफ्तारी के बाद सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी को पुलिस की प्रारंभिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन मुख्य साजिश और संभावित अन्य संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जनपद हरिद्वार में इस हत्याकांड को लेकर चर्चाएं जारी हैं और लोग न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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