“चमोली में जिला कोषागार अधिकारी पेंशनर्स को डीएलसी ऐप और डिजिटल सेवाओं की जानकारी देते हुए”
उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में चमोली जिले में जिला कोषागार द्वारा सोमवार को उपकोषागार परिसर में पेंशनर्स के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों ने पेंशनर्स को डिजिटल माध्यमों से सेवाओं का लाभ लेने, साइबर सुरक्षा और चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी योजनाओं की जानकारी दी।
सरकारी सेवाओं में डिजिटल सुधार की दिशा में पहल
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
विशेषकर पेंशनर्स (पेंशनभोगियों) को मिलने वाली सुविधाओं में पारदर्शिता और सरलता लाने के लिए DLCP App (Digital Life Certificate Portal) और डोर-स्टेप सर्विस जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं।
रजत जयंती वर्ष के अवसर पर सरकार इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न जिलों में कार्यशालाएँ आयोजित कर रही है
पेंशनर्स को दी गई व्यावहारिक जानकारी
सोमवार को उपकोषागार चमोली में आयोजित इस कार्यशाला में सहायक कोषागार अधिकारी सुरेंद्र सिंह वर्मा और मोहम्मद असलम ने पेंशनर्स को विभागीय योजनाओं और सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पेंशनर्स अब बिना दफ्तर आए अपने जीवित प्रमाण पत्र (Life Certificate) ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
इसके लिए उन्हें DLC App का उपयोग करना होगा, जिससे प्रक्रिया सरल और समय की बचत होगी।
अधिकारियों ने दी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जानकारी
सहायक कोषागार अधिकारी सुरेंद्र वर्मा ने कार्यशाला में बताया कि सरकार ने घर बैठे जीवित प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा शुरू की है।
इसके अलावा पेंशनर्स अपने पारिवारिक पेंशन आवेदन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) और अन्य सेवाओं की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं।
उन्होंने पेंशनर्स को साइबर धोखाधड़ी से बचाव के तरीकों की जानकारी देते हुए कहा कि—
“किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। सभी वित्तीय कार्य केवल आधिकारिक पोर्टल या ऐप के माध्यम से ही करें।”
डिजिटल इंडिया मिशन से जुड़ी नई संभावनाएँ
यह कार्यशाला केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन और राज्य सरकार के ई-गवर्नेंस अभियान का एक अहम हिस्सा मानी जा रही है।
इस पहल से वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न केवल सुविधाजनक सेवाएँ मिलेंगी, बल्कि भ्रष्टाचार और देरी जैसी समस्याओं में कमी आने की भी उम्मीद है।
डीएलसी ऐप और ऑनलाइन पेंशन प्रक्रिया से सरकारी कर्मचारियों पर बोझ कम होगा और सेवा वितरण अधिक पारदर्शी बनेगा।
पेंशनर्स को मिलेगा त्वरित लाभ
इस कार्यशाला का सीधा लाभ जिले के उन सैकड़ों पेंशनर्स को मिलेगा, जो हर वर्ष जीवित प्रमाण पत्र जमा करने या पेंशन अपडेट के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाते थे।
अब वे घर बैठे मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
साथ ही, साइबर सुरक्षा पर मिली जानकारी से उन्हें डिजिटल लेन-देन में अधिक सतर्कता बरतने में मदद मिलेगी।
पहले पेंशन प्रक्रिया में कागजी कार्यवाही और सत्यापन के कारण पेंशन जारी होने में देरी आम थी।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद औसत प्रोसेसिंग समय में लगभग 40% तक की कमी दर्ज की गई है।
चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में, जहाँ परिवहन और दूरी एक बड़ी चुनौती है, डिजिटल सुविधाएँ पेंशनर्स के लिए एक बड़ी राहत हैं।
अधिकारियों और प्रतिभागियों की उपस्थिति
कार्यशाला में सहायक कोषागार अधिकारी सुरेंद्र वर्मा, मोहम्मद असलम के साथ-साथ सहायक लेखाकार सोनाली, रेणु, राकेश जोशी आदि मौजूद रहे।
पेंशनर्स ने भी विभागीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी जागरूकता कार्यशालाएँ नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि सभी वरिष्ठ नागरिक नई तकनीक से जुड़ सकें।
डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में कदम
जिला कोषागार चमोली की यह कार्यशाला सरकारी सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
इससे न केवल पेंशनर्स का जीवन सरल होगा, बल्कि शासन-प्रशासन में जनता का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।
यदि ऐसी पहलें निरंतर जारी रहीं, तो राज्य जल्द ही पूर्ण रूप से “डिजिटल उत्तराखंड” बनने की दिशा में अग्रसर होगा।
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