“चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना सुरंग हादसे के बाद जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती श्रमिक”
चमोली में टीएचडीसी परियोजना सुरंग में बड़ा हादसा, दो लोको ट्रेनों की टक्कर से मचा हड़कंप
देहरादून / चमोली
उत्तराखंड के चमोली जनपद से एक बड़ी औद्योगिक दुर्घटना की खबर सामने आई है। पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन टीएचडीसी विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब शिफ्ट परिवर्तन के दौरान सुरंग के भीतर मजदूरों को लाने-ले जाने वाली दो लोको ट्रेनों (ट्रॉलियों) की आपस में टक्कर हो गई।
घटना के समय सुरंग के अंदर कुल 109 श्रमिक मौजूद थे, जिससे हादसे की गंभीरता और बढ़ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी श्रमिक की जान नहीं गई, लेकिन कई मजदूर इस दुर्घटना से प्रभावित हुए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी परियोजना की टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) साइट पर हुई। शिफ्ट परिवर्तन के समय श्रमिकों को सुरंग के भीतर से बाहर और बाहर से भीतर लाने के लिए प्रयोग की जा रही दो लोको ट्रॉलियां आपस में टकरा गईं।
अचानक हुई इस टक्कर से सुरंग के भीतर काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। कई श्रमिक गिर पड़े, जिससे उन्हें हल्की-फुल्की चोटें आईं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया संज्ञान
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जिलाधिकारी चमोली से दूरभाष पर वार्ता कर हादसे की पूरी जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि—
- सभी घायलों को तत्काल और बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
- आवश्यकता पड़ने पर घायलों को उच्च चिकित्सालयों में रेफर किया जाए
- प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ राहत कार्य सुनिश्चित करे
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक पहुंचे अस्पताल
हादसे की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार तत्काल जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुंचे।
उन्होंने वहां भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना और चिकित्सकों को निर्देश दिए कि सभी श्रमिकों का समुचित, त्वरित और बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से घायलों और उनके परिजनों को राहत मिली।
घायलों का उपचार: प्रशासन ने दी पूरी जानकारी
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने हादसे के बाद घायलों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उनके अनुसार—
- 70 श्रमिकों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया
- इनमें से 66 श्रमिकों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें घर भेज दिया गया
- 4 श्रमिकों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती किया गया
- पीपलकोटी विवेकानंद चिकित्सालय में
- 18 श्रमिकों का प्राथमिक उपचार किया गया और उन्हें घर भेज दिया गया
- 21 श्रमिकों को किसी प्रकार की चोट नहीं लगी
- वे घटना स्थल से ही सुरक्षित अपने घर चले गए
प्रशासन के अनुसार, सभी श्रमिक फिलहाल सुरक्षित हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
रेलवे से कोई संबंध नहीं, स्पष्टीकरण जारी
घटना को लेकर कुछ समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर इसे रेलवे ट्रेन हादसा बताने की भ्रामक जानकारी सामने आई। इस पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी किया गया।
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि—
- यह घटना भारतीय रेलवे से किसी भी प्रकार से संबंधित नहीं है
- सुरंग के भीतर प्रयोग की जा रही लोको ट्रॉली प्रोजेक्ट स्तर पर उपयोग की जाने वाली स्थानीय परिवहन व्यवस्था है
- समाचारों में संदर्भित ट्रेन भारतीय रेलवे की ट्रेन नहीं है
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस घटना ने हाइड्रो पावर परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- सुरंगों में कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए
- शिफ्ट परिवर्तन के समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है
- ट्रॉलियों और परिवहन उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच जरूरी है
प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना की समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस घटना ने हाइड्रो पावर परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- सुरंगों में कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए
- शिफ्ट परिवर्तन के समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है
- ट्रॉलियों और परिवहन उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच जरूरी है
प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना की समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस घटना ने हाइड्रो पावर परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- सुरंगों में कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए
- शिफ्ट परिवर्तन के समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है
- ट्रॉलियों और परिवहन उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच जरूरी है
प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना की समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस घटना ने हाइड्रो पावर परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- सुरंगों में कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए
- शिफ्ट परिवर्तन के समय अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है
- ट्रॉलियों और परिवहन उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच जरूरी है
प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना की समीक्षा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
टीएचडीसी परियोजना का महत्व
विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की प्रमुख हाइड्रो पावर परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना से राज्य को—
- बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी
- स्थानीय लोगों को रोजगार
- क्षेत्रीय विकास
जैसे कई लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसे में परियोजना के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।
स्थानीय लोगों और श्रमिकों में दहशत
हादसे के बाद कुछ समय के लिए परियोजना स्थल और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल रहा। हालांकि प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई। कई श्रमिकों ने बताया कि टक्कर अचानक हुई, लेकिन राहत कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।
चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हुई यह दुर्घटना एक गंभीर चेतावनी है। भले ही इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना सुरंग निर्माण और औद्योगिक परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा तत्काल संज्ञान लेना और प्रशासन की सक्रियता से घायलों को समय पर इलाज मिल सका। अब उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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