हिमाचल मंत्री जगमोहन सिंह चौहान चालदा महाराज की आगवानी करते हुए श्रद्धालुओं संग
विकासनगर/सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में धार्मिक आस्था का अनूठा संगम इस बार देखने को मिल रहा है। लोगों की आत्मिक भावना और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक छत्रधारी चालदा महाराज के ऐतिहासिक आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति की बयार बह रही है। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग मंत्री जगमोहन सिंह चौहान स्वयं महाराज की आगवानी के लिए पहुंचे। उनके साथ लगभग 600 श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था भी विकासनगर पहुंचा है।
मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि सिरमौर जिले के पश्मी गांव में महाराज की अगवानी और प्रतिष्ठा कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। ग्रामीणों से लेकर प्रशासन तक—हर कोई इस पावन क्षण का साक्षी बनने को उत्सुक है। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है और लोग इसे पीढ़ियों में एक बार आने वाला ऐतिहासिक अवसर बता रहे हैं।
सात वर्ष पहले हुआ था आगमन का संकेत
उद्योग मंत्री ने बताया कि लगभग सात वर्ष पूर्व महाराज ने अपने संदेशवाहक के माध्यम से पश्मी गांव में विराजने की इच्छा प्रकट की थी। तत्कालीन ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इसे सबसे बड़ा सौभाग्य मानते हुए—
- भव्य मंदिर निर्माण
- व्यवस्थाओं का विस्तार
- श्रद्धालुओं की सेवा हेतु सामूहिक योगदान
जैसी तैयारियों में तत्परता दिखाई।
ग्रामीणों के अथक परिश्रम और श्रद्धा के फलस्वरूप करीब एक करोड़ रुपये की लागत से विशाल मंदिर निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस मंदिर में महाराज 14 दिसंबर 2025 से एक वर्ष तक विराजमान रहेंगे, जब तक उनकी इच्छा हो।
द्राबिल गांव में होगा भव्य पड़ाव
मंत्री ने बताया कि 13 दिसंबर की रात्रि को महाराज सिरमौर के द्राबिल गांव में पधारेंगे। यहां—
- 30 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था
- आवास और ठहराव के पुख्ता इंतजाम
- सुरक्षा और परिवहन सुविधाएँ
स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पूरी कर ली गई हैं।
यह पड़ाव कार्यक्रम एक बड़े भक्ति उत्सव में बदल चुका है। ग्रामीणों का कहना है—
“हमारे जीवन का यह सबसे बड़ा सौभाग्य, ऐसा अवसर बार-बार नहीं आता।”
50 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति की संभावना
मंत्री जगमोहन सिंह चौहान ने बताया—
“पश्मी गांव ही नहीं, पूरे प्रदेश की जनता इस दिव्य क्षण की प्रतीक्षा में है।
अनुमान है कि कम से कम 50 हजार श्रद्धालु इस समारोह का हिस्सा बनाएँगे।”
यह संख्या और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि आस-पास के जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की भी भारी भागीदारी अपेक्षित है। बसों का संचालन, स्वयंसेवकों की तैनाती और चिकित्सा शिविर भी आयोजित किए गए हैं।
ग्रामीणों का सामूहिक योगदान बना मिसाल
इस धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि—
✔ मंदिर जनता के दान और श्रमदान से बना
✔ स्वागत-सम्मान में कोई भेदभाव नहीं
✔ हर जाति-समुदाय की समान भागीदारी
✔ महिलाएँ अग्रणी नेतृत्व में
नंबरदार लाखी राम शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने आस-पास के गाँवों में स्वयं जाकर निमंत्रण वितरित किए हैं। ग्रामीणों ने कहा—
“महाराज स्वयं हमें चुनकर आए हैं।
हम अपने अतिथि-ईश्वर का सर्वोत्तम आदर करेंगे।”
शिलाई क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का वातावरण
चालदा महाराज के प्रवास कार्यक्रम ने शिलाई क्षेत्र में नई ऊर्जा और धर्मनिष्ठा का संचार किया है।
लोगों की मान्यता है कि महासू देवता के दर्शनों से घर-परिवार में सुख-शांति आती है और प्रत्येक संकट का समाधान होता है।
- गाँव-गाँव में भजन संध्याएँ
- ढोल-नगाड़ों की गूंज
- रात्रि जागरण
- देवी-देवताओं की शोभायात्राएँ
जैसी गतिविधियाँ लगातार आयोजित की जा रही हैं।
युवाओं में भी इस आयोजन को लेकर अत्यधिक उत्साह देखा जा रहा है।
धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास
यह आयोजन केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि—
पहाड़ी संस्कृति
लोक परंपराएँ
देवभूमि के आध्यात्मिक इतिहास
को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का बड़ा अवसर है।
जगमोहन सिंह चौहान ने कहा—
“महासू महाराज हमारी संस्कृति के संरक्षक हैं।
उनके आगमन से पूरा क्षेत्र पवित्र और समृद्ध होगा।”
क्षेत्रीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार इस आयोजन का प्रभाव केवल धार्मिक नहीं रहेगा होटल-ढाबों की आय में बढ़ोतरी स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा घरेलू पर्यटन का विस्तार रोजगार सृजन ग्रामीण कारीगरों और व्यावसायिक समूहों ने भी इसका स्वागत किया है।
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