उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा सीबीआई जांच की मांग का ज्ञापन
विकासनगर
उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासत और जन आंदोलन तेज हो गया है। इस जघन्य हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने मंगलवार को राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। उक्रांद ने मांग की है कि इस मामले की सीबीआई जांच किसी सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश की प्रत्यक्ष निगरानी में कराई जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और जनता का टूटा हुआ भरोसा बहाल हो।
मंगलवार को विकासनगर में उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए इस ज्ञापन में उक्रांद नेताओं ने मौजूदा जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि अब तक की जांच से आम जनता संतुष्ट नहीं है और इस पूरे प्रकरण में सच्चाई सामने लाने के लिए उच्चस्तरीय न्यायिक निगरानी बेहद जरूरी है।
मौजूदा जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
उक्रांद नेताओं ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद से जिस तरह जांच आगे बढ़ी है, उससे जनता का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका से भी जुड़ा हुआ है।
उक्रांद का आरोप है कि जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि पार्टी ने मांग की है कि यदि सीबीआई जांच होती है तो वह किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
राष्ट्रपति से की गई यह प्रमुख मांगें
राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में उक्रांद ने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:
- अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच।
- जांच प्रक्रिया पर किसी रिटायर्ड जज की प्रत्यक्ष निगरानी।
- जांच से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
- दोषियों को जल्द से जल्द सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए।
- पीड़िता के परिवार को पूर्ण न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
उक्रांद नेताओं का कहना है कि जब तक जांच पारदर्शी नहीं होगी, तब तक जनता को संतोष नहीं मिल सकता।
जनता का भरोसा टूटा, न्याय की उम्मीद बाकी
उक्रांद नेताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में जिस तरह से शुरुआत में घटनाक्रम सामने आए, उससे आम लोगों में गहरा आक्रोश है। पार्टी का दावा है कि आज भी प्रदेश की जनता इस सवाल का जवाब चाहती है कि आखिर अंकिता को न्याय कब मिलेगा।
नेताओं ने कहा कि यदि जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रहेगा, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी। इसलिए इस मामले में सर्वोच्च स्तर की निगरानी अनिवार्य है।
विकासनगर में सौंपा गया ज्ञापन
यह ज्ञापन विकासनगर में उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया। इस दौरान उक्रांद के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। ज्ञापन सौंपते समय नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत न्याय की मांग दोहराई।
उक्रांद कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो पार्टी आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक संवेदनशील मामला
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में से एक रहा है। इस केस ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। महिला सुरक्षा, वीआईपी कल्चर और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दे इस हत्याकांड के साथ जुड़े रहे हैं।
उक्रांद का कहना है कि जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका नहीं जा सकता।
उक्रांद का स्पष्ट संदेश
उत्तराखंड क्रांति दल ने साफ किया कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सत्य के लिए है। पार्टी का कहना है कि अंकिता को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए हर स्तर पर दबाव बनाया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय और केंद्र सरकार इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच रिटायर्ड जज की निगरानी में सीबीआई को सौंपी जाएगी या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, उक्रांद की इस पहल से एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
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