“अल्मोड़ा में वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित पशु स्वामियों को मुआवजा राशि वितरित करता वन विभाग”
अल्मोड़ा उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में लगातार बढ़ते वन्यजीव संघर्ष के मामलों के बीच अल्मोड़ा जनपद से राहत भरी खबर सामने आई है। वन्यजीवों के हमलों से प्रभावित लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करते हुए वन विभाग ने मानव घायल और पशु क्षति के मामलों में कुल 2 करोड़ 49 लाख 18 हजार रुपये की मुआवजा राशि वितरित की है। यह राशि लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण के बाद सीधे लाभार्थियों के खातों में आरटीजीएस के माध्यम से भेजी गई है।
वन्यजीवों के हमलों से जनहानि और पशुधन की क्षति उत्तराखंड के कई ग्रामीण और वन सीमावर्ती क्षेत्रों में एक गंभीर समस्या बनी हुई है। खासकर अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिले में, जहां गांव जंगलों के बेहद करीब बसे हुए हैं, वहां जंगली जानवरों से टकराव की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे में मुआवजा राशि का समय पर भुगतान प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आता है।
दो वर्षों के लंबित मामलों का हुआ निस्तारण
प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि शासन से धनराशि प्राप्त होते ही वर्ष 2024-25 और 2025-26 के सभी लंबित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निस्तारण कर दिया गया है। इन दो वर्षों में वन्यजीव संघर्ष के कारण मानव घायल होने की कुल 11 घटनाएं दर्ज की गई थीं।
इनमें से दो मामले गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों से संबंधित थे, जबकि नौ मामले साधारण रूप से घायल लोगों के थे। इन सभी मानव घायल प्रकरणों में कुल 3 लाख 35 हजार रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है। विभाग द्वारा यह राशि नियमानुसार तय मानकों के आधार पर प्रदान की गई।
पशु क्षति के 840 मामलों में 2.45 करोड़ से अधिक का भुगतान
मानव घायल मामलों के अलावा, वन्यजीवों के हमलों में पशु क्षति के मामले कहीं अधिक सामने आए। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अल्मोड़ा जनपद में 840 पशु स्वामियों को मुआवजा दिया गया है। इन मामलों में गाय, भैंस, बकरी, बैल, घोड़ा और खच्चर जैसे पशुओं की क्षति शामिल है।
पशु क्षति की भरपाई के लिए कुल 2 करोड़ 45 लाख 83 हजार रुपये की धनराशि वितरित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक प्रमुख साधन है और ऐसे में पशुओं की क्षति परिवार की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित करती है। मुआवजा राशि मिलने से पशु पालकों को कुछ हद तक राहत मिली है।
आरटीजीएस से सीधे खातों में भेजी गई राशि
वन विभाग ने पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी पात्र लाभार्थियों को मुआवजा राशि आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी है। इससे न केवल प्रक्रिया तेज हुई, बल्कि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना भी समाप्त हुई है।
विभाग की प्राथमिकता है त्वरित राहत
प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित लोगों को समय पर राहत देना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शासन से जैसे ही धनराशि उपलब्ध होती है, विभाग द्वारा सभी पात्र प्रकरणों का सत्यापन कर भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है, ताकि प्रभावित परिवारों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े और उन्हें समय रहते आर्थिक सहायता मिल सके।
बढ़ते वन्यजीव संघर्ष पर चिंता
गौरतलब है कि अल्मोड़ा सहित पूरे कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष न केवल जनहानि का कारण बन रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में समय पर मुआवजा वितरण से प्रभावितों को राहत तो मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए वन्यजीव प्रबंधन और जनजागरूकता की भी आवश्यकता है।
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