हरिद्वार में ऑपरेशन स्माइल की सफलता, 8 साल बाद मां से मिला बिछड़ा बेटा
हरिद्वार में नवरात्र पर्व के अवसर पर पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक मां को उसका खोया हुआ बेटा वापस दिलाया। AHTU (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) की ऑपरेशन स्माइल टीम की मेहनत से आठ साल से बिछड़ा बेटा अपनी मां से मिल सका, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की रहने वाली ममता पिछले आठ वर्षों से अपने दो गुमशुदा बेटों की तलाश में दर-दर भटक रही थी। बताया गया कि उनके दोनों बेटे—सोनू (6 वर्ष) और मोनू (4 वर्ष)—पिता की डांट से नाराज होकर घर से निकल गए थे और फिर कभी वापस नहीं लौटे। इसके बाद माता-पिता ने विभिन्न राज्यों और शहरों में जाकर बच्चों की तलाश की, यहां तक कि स्थानीय पुलिस थानों में भी गुमशुदगी दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी।
हर दिन नई उम्मीद के साथ तलाश शुरू होती और शाम तक निराशा हाथ लगती, लेकिन परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। आखिरकार 16 मार्च 2026 को हरिद्वार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर खड़ी बांद्रा एक्सप्रेस से AHTU टीम ने तीन बच्चों को रेस्क्यू किया। काउंसलिंग के दौरान उनमें से एक बच्चे की पहचान सोनू के रूप में हुई।
पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि बच्चे द्वारा दी गई जानकारी अधूरी थी। इसके बावजूद टीम ने बिहार और उत्तर प्रदेश के कई गांवों में मिलते-जुलते नामों की तलाश की, ग्राम प्रधानों और संबंधित थानों से संपर्क किया तथा मल्टीमीडिया माध्यमों का भी सहारा लिया, लेकिन शुरुआती दौर में कोई सफलता नहीं मिली।
लगातार प्रयासों के बाद 19 मार्च को टीम का संपर्क सोनू की मौसी सीता देवी से हुआ, जिन्होंने बताया कि सोनू की मां ममता अपने बच्चों की तलाश में गुजरात गई हुई हैं। इसके बाद पुलिस ने वीडियो कॉल के माध्यम से मां और बेटे की बात करवाई। यह वह भावुक क्षण था जब आठ वर्षों की जुदाई खत्म हुई।
इसके बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सोनू को खुला आश्रय गृह कनखल से मुक्त कर उसकी मां को सौंप दिया गया। इतने वर्षों बाद अपने बेटे को पाकर मां की आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर सुकून साफ दिखाई दिया।
ममता ने हरिद्वार पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उनका बेटा वापस मिल गया है। साथ ही उन्होंने अपने दूसरे बेटे मोनू की तलाश में भी पुलिस से मदद की अपील की है।
इस पूरे अभियान में AHTU ऑपरेशन स्माइल टीम के उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल राकेश कुमार, कांस्टेबल दीपक चंद और महिला आरक्षी गीता देवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी मेहनत और संवेदनशीलता के कारण एक परिवार की खोई खुशियां वापस लौट सकीं।
हरिद्वार पुलिस की यह पहल न केवल कानून व्यवस्था का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पुलिस समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी मानवता और संवेदनशीलता के साथ निभा रही है।
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