नंदा देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक का दृश्य
अल्मोड़ा ।
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक नंदा राजजात यात्रा 2026 को स्थगित करने के निर्णय को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को अल्मोड़ा स्थित नंदा देवी मंदिर प्रांगण में नंदा देवी मंदिर समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गढ़वाल के नौटी क्षेत्र की नंदा राजजात समिति द्वारा कुमाऊं पक्ष से बिना किसी औपचारिक बातचीत के यात्रा स्थगित करने के निर्णय पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई।
बैठक में मंदिर समिति के पदाधिकारियों और कुमाऊं नंदा राजजात समिति के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि कुमाऊं को विश्वास में लिए बिना लिया गया यह निर्णय न केवल परंपराओं की अनदेखी है, बल्कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं के भी विरुद्ध है।
नंदा देवी मंदिर प्रांगण में हुई अहम बैठक
नंदा देवी मंदिर समिति की ओर से आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने के निर्णय पर चर्चा करना और कुमाऊं पक्ष की आपत्तियों को एकजुट होकर सामने रखना था।
समिति सदस्यों ने कहा कि नंदा राजजात केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि कुमाऊं और गढ़वाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में किसी एक पक्ष द्वारा एकतरफा निर्णय लेना उचित नहीं है।
वर्ष 2000 से जुड़ा ऐतिहासिक संदर्भ
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वर्ष 2000 में, लगभग 75 वर्षों के अंतराल के बाद, नंदा राजजात यात्रा में कुमाऊं की औपचारिक भागीदारी सुनिश्चित हुई थी। उस समय तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी और गढ़वाल पवार वंशज कुंवर बलवंत सिंह के आग्रह पर कुमाऊं पक्ष को यात्रा में सम्मिलित किया गया था।
समिति सदस्यों ने कहा कि तभी से नंदा राजजात एक संयुक्त परंपरा के रूप में संपन्न होती आ रही है और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव सभी पक्षों की सहमति से ही किया जाना चाहिए।
मनोज वर्मा का तीखा बयान
कुमाऊं नंदा राजजात समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“बिना किसी चर्चा और सहमति के नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने का निर्णय पूरी तरह हास्यास्पद है। यह तुगलकी फरमान जैसा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार नंदा राजजात यात्रा वर्ष 2026 में ही आयोजित होनी चाहिए और कुमाऊं पक्ष इस पर अडिग है।
मुख्यमंत्री से वार्ता की तैयारी
मनोज वर्मा ने जानकारी दी कि इस मुद्दे को लेकर चंद्रवंशी युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह के नेतृत्व में शीघ्र ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की जाएगी। इस मुलाकात में कुमाऊं पक्ष अपनी आपत्तियों और सुझावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद कुमाऊं नंदा राजजात समिति के विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों की एक विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अगुवाई नंदा देवी मंदिर समिति, अल्मोड़ा करेगी।
आगे की रणनीति पर मंथन
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कुमाऊं पक्ष धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखेगा। समिति सदस्यों ने कहा कि नंदा राजजात जैसी आस्था और परंपरा से जुड़ी यात्रा में किसी भी प्रकार का निर्णय सामूहिक सहमति से ही होना चाहिए।
बैठक में रहे प्रमुख लोग उपस्थित
इस बैठक में कुमाऊं नंदा राजजात समिति के सचिव मनोज सनवाल, अनूप साह, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, अमरनाथ सिंह नेगी, हरीश सिंह भंडारी, अमित साह मोनू, अर्जुन बिष्ट, अभिषेक जोशी, रवि गोयल, गोविंद मेहरा, कुलदीप मेर, नमन बिष्ट सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सभी ने एकमत होकर कहा कि नंदा राजजात 2026 को लेकर लिया गया एकतरफा निर्णय वापस लिया जाना चाहिए।
नंदा राजजात का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
नंदा राजजात यात्रा उत्तराखंड की सबसे लंबी और कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से ससुराल तक विदा करने का प्रतीक मानी जाती है और इसमें कुमाऊं व गढ़वाल दोनों क्षेत्रों की आस्था गहराई से जुड़ी हुई है। नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने के निर्णय ने धार्मिक और सांस्कृतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। नंदा देवी मंदिर समिति और कुमाऊं नंदा राजजात समिति का स्पष्ट कहना है कि बिना सहमति लिया गया कोई भी फैसला स्वीकार्य नहीं होगा। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री से होने वाली वार्ता इस विवाद के समाधान की दिशा तय करेगी।
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