मॉडल महाविद्यालय मीठीबेरी में आपदा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन
हरिद्वार।
राजकीय मॉडल महाविद्यालय मीठीबेरी, हरिद्वार में आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह कार्यशाला लोक चेतना मंच रानीखेत के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था।
कार्यशाला के द्वितीय एवं अंतिम दिवस का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार, मुख्य अतिथि जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी श्रीमती मीरा रावत तथा मुख्य प्रशिक्षक श्री मनोज कंडियाल द्वारा माँ शारदा के दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में अनुशासन, उत्साह और सीखने का सकारात्मक वातावरण देखने को मिला।
संयोजक द्वारा अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुलदीप चौधरी ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों का औपचारिक परिचय कराया। उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक एवं आगंतुकों को बैज लगाकर उनका स्वागत किया और कार्यशाला की रूपरेखा से सभी को अवगत कराया।
डॉ. चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में आपदा प्रबंधन का ज्ञान केवल प्रशासन तक सीमित न रहकर आम नागरिकों और विशेष रूप से विद्यार्थियों तक पहुँचना आवश्यक है।
प्रथम सत्र: आपदा प्रबंधन और अधिनियमों की जानकारी
कार्यशाला के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती मीरा रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, हरिद्वार ने छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि—
“प्राकृतिक और मानवजनित आपदाएं कभी भी आ सकती हैं। ऐसे में जागरूकता और सही प्रशिक्षण ही जान-माल की सुरक्षा का सबसे बड़ा साधन है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न अधिनियमों, नीतियों और प्रशासनिक ढांचे के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही यह भी समझाया कि आपदा के समय प्रशासन और आम नागरिकों की भूमिका क्या होती है।
आपदा प्रबंधन की सामान्य जानकारी

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में श्रीमती कुसुम घिल्डियाल ने छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन से संबंधित सामान्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, आगजनी और बादल फटने जैसी घटनाओं के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने छात्रों को यह भी समझाया कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद किस प्रकार की तैयारियाँ आवश्यक होती हैं।
प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के तृतीय सत्र में मुख्य प्रशिक्षक श्री मनोज कंडियाल ने आपदा प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्राथमिक उपचार (First Aid) के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान विद्यार्थियों को चोट लगने, रक्तस्राव, बेहोशी, हड्डी टूटने और अन्य आपात स्थितियों में तुरंत सहायता प्रदान करने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया। छात्रों ने इस सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया।
समापन समारोह और प्रमाण पत्र वितरण
कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमती मीरा रावत एवं महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार द्वारा सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
डॉ. सुनील कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि—
“इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को न केवल आपदा से निपटने में सक्षम बनाती हैं, बल्कि उनमें सामाजिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता भी विकसित करती हैं।”
उन्होंने लोक चेतना मंच, प्रशिक्षकों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में रही गणमान्य उपस्थिति
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रो. सतेन्द्र कुमार, डॉ. अरविन्द वर्मा, डॉ. देशराज सिंह, डॉ. सुनीता बिष्ट, श्री शशिधर उनियाल, पूनम सिंह, कुलदीप, सूरज सिंह सहित अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
इसके साथ ही लोक चेतना मंच से श्रीमती आयुषी (डॉक्यूमेंटेशन ऑफिसर), श्री आशीष शर्मा (कम्युनिटी मोबाइलाइजर), श्रीमती कुसुम घिल्डियाल एवं दिक्षा शर्मा की भी सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का संचालन आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुलदीप चौधरी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
राजकीय मॉडल महाविद्यालय मीठीबेरी में आयोजित यह दो दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई। इससे न केवल छात्रों को आपदा से निपटने का व्यावहारिक ज्ञान मिला, बल्कि समाज के प्रति उनके दायित्वबोध में भी वृद्धि हुई। ऐसी कार्यशालाएं भविष्य में सुरक्षित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यह भी पढ़ें–अमित शाह ने किया कल्याण पत्रिका शताब्दी अंक का भव्य विमोचन…
