डोईवाला में किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ रैली निकालते किसान
ऋषिकेश
संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को उत्तराखंड के डोईवाला क्षेत्र में किसानों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने इस अवसर पर “प्रतिरोध दिवस” मनाते हुए बीज कानून 2025 और बिजली कानून 2025 को किसान विरोधी करार दिया और इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
डोईवाला गन्ना समिति परिसर से शुरू हुई किसान रैली तहसील मुख्यालय तक पहुंची, जहां किसानों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में किसानों ने केंद्र सरकार की नीतियों को खेती-किसानी के लिए घातक बताया और कहा कि मौजूदा कानून किसानों की आय बढ़ाने के बजाय उन्हें कर्ज और संकट की ओर धकेल रहे हैं।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
सभा को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक ताजेंद्र सिंह ‘ताज’ ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे तो करती है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने के सवाल पर लगातार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि जब तक एमएसपी को कानून का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक किसानों की आय सुरक्षित नहीं हो सकती।
कर्ज माफी और किसान सम्मान निधि पर सवाल
किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष गंगाधर नौटियाल ने किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की मांग उठाते हुए कहा कि बढ़ती लागत और कम आय के कारण किसान लगातार कर्ज में डूबते जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 2000 रुपये की किस्त को नाकाफी बताते हुए इसे किसानों के साथ छलावा करार दिया।
किसान आत्महत्या मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
डोईवाला गन्ना समिति के पूर्व अध्यक्ष मनोज नौटियाल और दलजीत सिंह ने ऊधमसिंह नगर जिले के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफियाओं और पुलिस के उत्पीड़न से तंग आकर किसान ने आत्महत्या की। नेताओं ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।
श्रमिक संगठनों ने भी दिया समर्थन
प्रदर्शन में किसान संगठनों के साथ-साथ श्रमिक संगठनों ने भी भाग लिया। सीआईटीयू के जिलाध्यक्ष कृष्ण गुनियाल ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने और न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये घोषित करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा श्रम कानून मजदूरों और किसानों दोनों के हितों के खिलाफ हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
किसान यूनियन (चढूनी) के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि ठोस निर्णय चाहते हैं।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में याकूब अली, इंद्रजीत सिंह, गुरदीप सिंह, बलवीर सिंह, उमेद बोरा सहित बड़ी संख्या में किसान और मजदूर संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन किसानों का आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला।
सरकार से सीधा संवाद की मांग
किसानों ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह किसानों से सीधे संवाद करे और जमीनी हकीकत को समझते हुए नीतियों में बदलाव करे। किसानों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है, तो उसे किसान-हितैषी फैसले लेने होंगे।
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