लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग का शुभारम्भ करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
लखनऊ उत्तरायणी कौथिग में मुख्यमंत्री धामी, उत्तराखंड की सांस्कृतिक जड़ों और विकास विज़न का किया विस्तार से वर्णन
देहरादून/लखनऊ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग के शुभारम्भ अवसर पर प्रतिभाग कर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया पर्व की प्रदेशवासियों और देशभर में रह रहे उत्तराखंडियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे माताओं-बहनों, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ाव का सशक्त प्रतीक है।
उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत का मंच
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लखनऊ में आयोजित यह उत्तरायणी कौथिग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक अद्भुत मंच है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की झलक न केवल हमारी समृद्ध परंपराओं को जीवित रखती है, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है।
उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ संकल्प को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण बताया।
पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों की सराहना
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय महापरिषद के 25 वर्षों के सांस्कृतिक, सामाजिक और सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने उत्तर प्रदेश में निवास कर रहे हजारों उत्तराखंडवासियों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखना संस्था की बड़ी उपलब्धि है। रजत जयंती वर्ष में प्रवेश करना महापरिषद की तपस्या, समर्पण और निरंतर सेवा का प्रमाण है।
लखनऊ से भावनात्मक जुड़ाव
मुख्यमंत्री धामी ने लखनऊ से अपने व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंधों को साझा करते हुए कहा कि यह शहर उनकी कर्मभूमि रहा है। यहीं से उन्होंने जनसेवा का संकल्प लिया था। उत्तरायणी जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में लखनऊ आना उनके लिए अपनी कर्मभूमि को नमन करने के समान है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संस्कृति को वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति, आस्था और सभ्यता को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे ऐतिहासिक कार्य इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ अभियान ने देश की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।
उत्तराखंड में विकास और विरासत साथ-साथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी इसी विज़न के अनुरूप देवभूमि के विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान, केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोलू जी, विवेकानंद और शारदा कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक
केदारनाथ-बद्रीनाथ मास्टर प्लान, केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोलू जी, विवेकानंद और शारदा कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को नई भव्यता मिल रही है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नया बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को अब केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखा गया है। नई नीतियों और योजनाओं के चलते राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर हब और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से उभर रहा है।
‘वेड इन उत्तराखंड’ और शीतकालीन पर्यटन अभियानों से पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय आर्थिकी को भी मजबूती मिली है।
गांवों की खुशहाली पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास की योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि होम-स्टे योजना, लखपति दीदी योजना, सौर स्वरोजगार योजना, एक जनपद-दो उत्पाद और हाउस ऑफ हिमालयाज जैसे प्रयासों से गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है।
आर्थिक प्रगति के आंकड़े किए साझा
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य गठन के समय की तुलना में आज उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था 26 गुना बढ़ चुकी है।
- प्रतिव्यक्ति आय 17 गुना बढ़कर ₹2,74,064
- राज्य का बजट ₹4,000 करोड़ से बढ़कर ₹1 लाख करोड़ से अधिक
- बिजली उत्पादन 4 गुना
- सड़कों की लंबाई दोगुनी
- 10 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेज संचालित
- मातृ मृत्यु दर में 12% की कमी
उन्होंने बताया कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत अब तक 1 लाख 68 हजार महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 44% रिवर्स पलायन हुआ है।
कानून व्यवस्था और अस्मिता की रक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार देवभूमि की अस्मिता, सुरक्षा और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू किए गए हैं।
अब तक 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है।
ऑपरेशन कालनेमी के तहत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई की गई है। 250 से अधिक अवैध मदरसे सील किए गए और 500 से अधिक अवैध ढांचे ध्वस्त किए गए हैं।
ऐतिहासिक फैसले और उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।
नकल विरोधी कानून के तहत 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया है और पिछले साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।
नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
“विकल्प रहित संकल्प” दोहराया
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यही नया उत्तराखंड है, जहाँ विकास, विश्वास और अवसर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के “विकल्प रहित संकल्प” को दोहराते हुए सभी से सहयोग और आशीर्वाद की अपील की। कार्यक्रम में पर्वतीय महापरिषद के पदाधिकारी, प्रवासी उत्तराखंडी समाज और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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