“वीपीकेएएस अल्मोड़ा में स्वच्छता ही सेवा अभियान के समापन अवसर पर प्रेस वार्ता करते निदेशक लक्ष्मी कान्त”
वीपीकेएएस अल्मोड़ा में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2025 का हुआ समापन
अल्मोड़ा
विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2025 के समापन अवसर पर बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक लक्ष्मी कान्त ने की। इस अवसर पर संस्थान द्वारा वर्ष 2025 में संचालित स्वच्छता गतिविधियों, जनजागरूकता अभियानों और अपशिष्ट को संपदा में बदलने के प्रयासों की विस्तृत जानकारी मीडिया के माध्यम से आमजन तक साझा की गई।
स्वच्छता पखवाड़ा: जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण
निदेशक लक्ष्मी कान्त ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में संस्थान स्तर पर तीन बार स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विशेष रूप से वर्ष के अंतिम चरण में 16 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक स्वच्छता पखवाड़े का आयोजन किया गया, जिसमें संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
इस अवधि में संस्थान की टीमों ने 12 विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया, जिसमें कुल 1240 लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। यह अभियान न केवल संस्थान परिसर तक सीमित रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाने में सफल रहा।
“स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि सोच है” – निदेशक लक्ष्मी कान्त
निदेशक लक्ष्मी कान्त ने कहा कि—
“स्वच्छता केवल परिसर की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, कार्यसंस्कृति और सामाजिक दायित्व से गहराई से जुड़ी हुई है।”
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए, तो समाज स्वतः ही स्वस्थ, सुंदर और अनुशासित बन सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और संस्थान के सभी कार्मिकों से आग्रह किया कि वे स्वच्छता को एक सतत प्रक्रिया के रूप में अपनाएं और ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना को संस्थान की सीमाओं से बाहर समाज तक ले जाएं।
अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर
प्रेस वार्ता के दौरान निदेशक लक्ष्मी कान्त ने अपशिष्ट प्रबंधन को स्वच्छता अभियान का एक अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि—
“अपशिष्ट का उत्पन्न होना स्वाभाविक है, लेकिन अत्यधिक कचरा आज एक गंभीर वैश्विक समस्या बनता जा रहा है।”
उन्होंने सभी से अपील की कि कचरे के उत्सर्जन को यथासंभव कम किया जाए और अपशिष्ट को संपदा में बदलने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश को स्वच्छ और हरित बनाने में भी मदद मिलेगी।
स्वच्छता नोडल अधिकारी ने प्रस्तुत की गतिविधियों की रिपोर्ट
प्रेस वार्ता में स्वच्छता नोडल अधिकारी मनोज कुमार ने स्वच्छता पखवाड़े के दौरान आयोजित गतिविधियों की संक्षिप्त आख्या पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत—
- संस्थान परिसर की नियमित साफ-सफाई
- प्रयोगशालाओं और कार्यालयों में स्वच्छता निरीक्षण
- आवासीय क्षेत्रों में सफाई अभियान
- श्रमदान कार्यक्रम
- स्वच्छता संदेशों का व्यापक प्रसार
- कर्मचारियों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी
सुनिश्चित की गई।
इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य स्वच्छता को एक दैनिक आदत के रूप में विकसित करना रहा।
वैज्ञानिकों और कार्मिकों की रही सक्रिय भूमिका
स्वच्छता पखवाड़े की सफलता में संस्थान के वैज्ञानिकों और कार्मिकों की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने न केवल संस्थान परिसर को स्वच्छ रखने में योगदान दिया, बल्कि जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज को भी स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया।
अभियान के दौरान यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता किसी एक दिन या पखवाड़े का कार्य नहीं, बल्कि यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रेस वार्ता में ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
प्रेस वार्ता के दौरान संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- फसल सुधार प्रभागाध्यक्ष – निर्मल कुमार हेडाऊ
- फसल सुरक्षा प्रभागाध्यक्ष – कृष्ण कान्त मिश्रा
- फसल उत्पादन प्रभागाध्यक्ष – बृज मोहन पाण्डेय
- सामाजिक विज्ञान अनुभागाध्यक्ष – कुशाग्रा जोशी
- मुख्य तकनीकी अधिकारी – रेनू सनवाल
- सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी – निधि सिंह
- वरिष्ठ तकनीशियन एवं स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा अभियान के सदस्य सचिव – देवेन्द्र सिंह कार्की
सहित सभी पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।
स्वच्छ भारत मिशन को मिल रहा संस्थागत सहयोग
वीपीकेएएस द्वारा चलाया गया यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन की भावना को सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ है। संस्थान द्वारा किए जा रहे ये प्रयास न केवल शैक्षणिक और शोध संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लिए भी एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
वीपीकेएएस अल्मोड़ा में आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2025 यह दर्शाता है कि यदि संस्थान, वैज्ञानिक और कार्मिक मिलकर प्रयास करें, तो स्वच्छता जैसे विषय पर व्यापक जनजागरूकता लाई जा सकती है।
यह अभियान न केवल सफाई तक सीमित रहा, बल्कि सोच में बदलाव, जिम्मेदारी की भावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचाने में सफल रहा। आने वाले समय में ऐसे प्रयास भारत को स्वच्छ, स्वस्थ और सतत विकास की दिशा में आगे ले जाएंगे।
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