मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल 2025 में इंद्रमणि बडोनी पर आधारित डाक्यूमेंट्री का प्रदर्शन
मसूरी
मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल 2025 के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला की पहली नाइट उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी को समर्पित की गई। 24 से 27 दिसंबर तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित कार्निवाल का शुभारंभ मसूरी के ऐतिहासिक टाउन हॉल में भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसमें उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और संघर्षों को मंच पर जीवंत किया गया।
नगर पालिका परिषद मसूरी द्वारा आयोजित इस विंटर लाइन कार्निवाल का उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और राज्य आंदोलन के नायकों को नई पीढ़ी से परिचित कराना भी है।
मांगल गीत से हुआ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक मांगल गीत के साथ हुई, जिसने पूरे सभागार को सांस्कृतिक वातावरण से भर दिया। जैसे ही लोक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि गूंजी, दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इसके बाद मंच पूरी तरह उत्तराखंड की संस्कृति और इतिहास को समर्पित हो गया।
इंद्रमणि बडोनी पर बनी डाक्यूमेंट्री ने छोड़ी गहरी छाप
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उत्तराखंडी फिल्म निर्देशक प्रदीप भंडारी द्वारा निर्मित इंद्रमणि बडोनी के जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री रही। इस डाक्यूमेंट्री में इंद्रमणि बडोनी के जन्म से लेकर उनके राजनीतिक संघर्ष, सामाजिक योगदान और उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
डाक्यूमेंट्री में दर्शाया गया कि किस प्रकार इंद्रमणि बडोनी ने अपने संपूर्ण जीवन को उत्तराखंड के पृथक राज्य की मांग के लिए समर्पित कर दिया। फिल्म में उनके त्याग, संघर्ष और संकल्प को दुर्लभ चित्रों और अभिलेखीय फुटेज के माध्यम से दर्शाया गया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
डाक्यूमेंट्री में फिल्माया गया भावपूर्ण गीत ‘कु होलु…’ विशेष रूप से दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना। गीत के बोल और संगीत ने बडोनी के संघर्ष और उत्तराखंड की पीड़ा को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। सभागार में कई दर्शक इस गीत के दौरान भावुक नजर आए।
अखोड़ी गांव और विट्ठल आश्रम की झलक
फिल्म में इंद्रमणि बडोनी के मूल गांव अखोड़ी और ऋषिकेश स्थित उनकी कुटिया विट्ठल आश्रम को भी खूबसूरती से दिखाया गया है। ये दृश्य दर्शकों को न केवल उनके निजी जीवन से जोड़ते हैं, बल्कि उनके सादगीपूर्ण जीवन दर्शन को भी उजागर करते हैं।
निर्देशक प्रदीप भंडारी ने बताया कि आम जनता तक यह फिल्म आसानी से पहुंचे, इसके लिए डाक्यूमेंट्री को प्रदर्शन के साथ ही यूट्यूब पर भी रिलीज कर दिया गया है।
लोकनृत्य ने मोहा दर्शकों का मन
इसके पश्चात स्वजन शिक्षा समिति पर्यटन घाटी के कलाकारों ने पारंपरिक उत्तराखंडी लोकनृत्य प्रस्तुत किए। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता और लोक जीवन की झलक देखने को मिली।
वीर भड़ माधो सिंह भंडारी पर नृत्य-नाटिका
कार्यक्रम का अगला और अत्यंत प्रभावशाली चरण रहा वीर भड़ माधो सिंह भंडारी पर आधारित नृत्य-नाटिका। राजेंद्र रावत और बलदेव राणा की टीम द्वारा प्रस्तुत इस नाटिका में उत्तराखंड के महान योद्धा माधो सिंह भंडारी के शौर्य, पराक्रम और तिब्बत विजय की गाथा को मंच पर जीवंत कर दिया गया।
नृत्य, संवाद और संगीत के संयोजन से प्रस्तुत इस नाटिका ने दर्शकों को इतिहास के उस दौर में पहुंचा दिया, जब उत्तराखंड के योद्धा अपनी वीरता से विदेशी आक्रमणकारियों को पराजित करते थे।
भावुक हुए दर्शक, गूंजती रही तालियां
माधो सिंह भंडारी की वीरता और बलिदान को जब मंच पर दर्शाया गया, तो कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। नाटिका के समापन पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह प्रस्तुति न केवल मनोरंजन थी, बल्कि उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास का जीवंत पाठ भी थी।
विंटर लाइन कार्निवाल: संस्कृति और पर्यटन का संगम
मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल हर वर्ष सर्दियों में आयोजित किया जाता है और यह उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन आयोजनों में से एक बन चुका है। इस कार्निवाल के माध्यम से मसूरी में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को उत्तराखंड की लोक संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से रूबरू कराया जाता है।
नगर पालिका परिषद के अनुसार, आगामी दिनों में भी संगीत संध्या, लोक कला प्रदर्शनी, साहसिक खेल और स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इंद्रमणि बडोनी और माधो सिंह भंडारी जैसे महान व्यक्तित्वों पर आधारित कार्यक्रम नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। ऐसे आयोजन न केवल इतिहास को जीवंत रखते हैं, बल्कि युवाओं में अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति गर्व की भावना भी जागृत करते हैं।
कुल मिलाकर, मसूरी विंटर लाइन कार्निवाल 2025 की पहली नाइट ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत सफल रही। इंद्रमणि बडोनी पर बनी डाक्यूमेंट्री और वीर माधो सिंह भंडारी पर आधारित नृत्य-नाटिका ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। यह आयोजन निश्चित रूप से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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