पछुवादून में तहसील प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते विहिप और बजरंग दल कार्यकर्ता
विकासनगर
पछुवादून क्षेत्र में सरकारी भूमि पर हो रहे कथित अवैध कब्जों और भूमाफिया को मिल रहे संरक्षण के विरोध में सोमवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने तहसील प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। सेलाकुई से हरबर्टपुर होते हुए विकासनगर तक निकाले गए इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने इसे “पछुवादून बचाओ आंदोलन” की शुरुआत बताते हुए चेतावनी दी कि जब तक भूमाफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले सफेदपोशों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
शहीद सतेंद्र चौक से शुरू हुआ आंदोलन
सोमवार सुबह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता सेलाकुई स्थित शहीद सतेंद्र चौक पर एकत्र हुए। सबसे पहले सभी कार्यकर्ताओं ने शहीद सतेंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च की शुरुआत की गई। प्रदर्शन के दौरान “पछुवादून बचाओ”, “भूमाफिया हटाओ”, और “सरकारी जमीन बचाओ” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
सुरक्षा के लिए पहने हेलमेट, प्रशासन पर गंभीर आरोप
रामपुर ग्रामसभा पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने हेलमेट पहन लिए। इस पर विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बताया कि दो वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी की घटना हुई थी, जिसका मुख्य आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहा है। उनका आरोप है कि अपराधियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से हेलमेट पहनना आवश्यक समझा गया।
सेलाकुई से विकासनगर तक निकाला गया पैदल मार्च
सेलाकुई से शुरू हुआ यह विरोध मार्च सहसपुर और हरबर्टपुर से होते हुए विकासनगर तहसील तक पहुंचा। रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और आम जनता से आंदोलन में समर्थन देने की अपील की। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए अवैध कब्जों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
‘पछुवादून सफेदपोश भूमाफिया के कब्जे में’ — विहिप
विकासनगर तहसील परिसर में प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विहिप के जिला सहमंत्री रमेश ढौंडियाल ने कहा कि पछुवादून आज सफेदपोश भूमाफिया के चंगुल में फंसा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि पर खुलेआम अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, लेकिन तहसील प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
उन्होंने कहा,
“पछुवादून की जमीनें भूमाफिया के हवाले की जा रही हैं। इससे न केवल कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि क्षेत्र की डेमोग्राफी भी तेजी से बदल रही है।”
डेमोग्राफी बदलने का आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को अवैध रूप से बसाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की सामाजिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना था कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं और स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
अपराधियों को मिल रहा संरक्षण
विहिप और बजरंग दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए तो पछुवादून क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सरकारी भूमि से अवैध कब्जे नहीं हटाए गए और भूमाफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि यह तब तक चलेगा जब तक पछुवादून को अवैध कब्जों से मुक्त नहीं करा लिया जाता।
स्थानीय लोगों का मिला समर्थन
प्रदर्शन के दौरान कई स्थानीय नागरिकों ने भी विहिप और बजरंग दल के आंदोलन को समर्थन दिया। लोगों का कहना था कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के कारण न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि क्षेत्र में अराजकता भी बढ़ रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर किन दबावों के चलते अवैध कब्जेदारों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने मांग की कि पूरे क्षेत्र में सरकारी भूमि का सर्वे कराकर अतिक्रमण हटाया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
इन नेताओं की रही मौजूदगी
इस विरोध प्रदर्शन में विहिप के जिला संयोजक शेखर बंसल, जिला अध्यक्ष कुलदीप, जिला सुरक्षा प्रमुख प्रदीप, नगर अध्यक्ष मनीष नेगी, विपिन नगर सह संयोजक अमित तोमर, संजय अग्रवाल, तुषार श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आंदोलन का अगला चरण जल्द
विहिप और बजरंग दल ने संकेत दिए हैं कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा। यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
पछुवादून क्षेत्र में अवैध कब्जों और कथित भूमाफिया गतिविधियों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले समय में प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अब देखना होगा कि तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्षेत्र की जनता को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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