“उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए”
देहरादून
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को 5 नए सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष मिल गए हैं। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित इन अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर नियुक्ति पत्र वितरित किए।
राज्य सरकार द्वारा लंबे समय से सरकारी महाविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने के प्रयास निरंतर जारी हैं, और इन नियुक्तियों को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
दुर्गम क्षेत्रों के महाविद्यालयों में पहली तैनाती
नियुक्ति पत्र पाने वाले इन पाँचों अभ्यर्थियों को राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में स्थित राजकीय महाविद्यालयों में पहली तैनाती दी गई है। सूची इस प्रकार है—
- संतोषी गौड़ – राजकीय महाविद्यालय नैनीडांडा
- अर्पित कुमार सिंह – राजकीय महाविद्यालय उपरैंखाल
- प्रीति जोशी – राजकीय महाविद्यालय भतरौंजखान
- चंदन सिंह जीना – राजकीय महाविद्यालय थलीसैण
- मनोज कुमार – राजकीय महाविद्यालय सोमेश्वर
दुर्गम क्षेत्रों के महाविद्यालय लंबे समय से पुस्तकालय कर्मचारी की कमी से जूझते रहे हैं। इस नियुक्ति से न केवल पुस्तकालयों में व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि छात्रों को आवश्यक पुस्तकें और अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध हो सकेगी।
मंत्री ने दी शुभकामनाएँ, कहा—“निष्ठा और ईमानदारी से करें कार्य”
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा—
“उच्च शिक्षा विभाग राज्य के युवाओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप सभी से अपेक्षा है कि अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करेंगे।”
डॉ. रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्गम क्षेत्रों में तैनात होना चुनौतीपूर्ण ज़रूर है, लेकिन यहीं से सेवा का वास्तविक अनुभव मिलता है।
उन्होंने कहा कि नए सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष अपने-अपने महाविद्यालयों के पुस्तकालयों को आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल पद्धति से लैस करने की दिशा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाएँगे।
उच्च शिक्षा विभाग में लगातार हो रही हैं भर्तियाँ
मंत्री रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने को लेकर गंभीर है।
उन्होंने कहा—
“सरकार चरणबद्ध तरीके से विभिन्न पदों पर नियुक्तियाँ कर रही है। पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति से न केवल व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को भी बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि—
- पुस्तकालयों में पुस्तकों का सुचित संचालन
- पुस्तकें छात्रों को समय पर उपलब्ध कराना
- डिजिटल कैटलॉगिंग
- पुस्तकालयों में कुशल कर्मियों की उपलब्धता
जैसी समस्याएँ लगातार सामने आती रही हैं।
नई नियुक्तियों से इन व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार होने की पूरी संभावना
छात्र–छात्राओं को मिलेगा सीधा लाभ
राज्य के दुर्गम महाविद्यालयों में अध्ययनरत हजारों छात्रों को इन नियुक्तियों से सीधा लाभ मिलेगा।
सहायक पुस्तकालयाध्यक्षों की तैनाती से—
- पुस्तकालय का कुशल संचालन
- विषयवार पुस्तक व्यवस्था
- संदर्भ पुस्तकों की उपलब्धता
- छात्रों को समय पर पुस्तक वितरण
- पुस्तकालय में अनुशासन
- डिजिटल रजिस्ट्रेशन
जैसी सुविधाएँ सुधारेंगी।
विशेष रूप से उन महाविद्यालयों में जहां वर्षों से पुस्तकालयाध्यक्षों के पद रिक्त थे, वहां छात्रों और शिक्षकों की शैक्षणिक जरूरतें अब बेहतर तरीके से पूरी होंगी।
युवाओं के चेहरे खिले, परिवारों में खुशी का माहौल
नियुक्ति पत्र पाकर चयनित युवाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
कई अभ्यर्थी अपने परिवारों के साथ समारोह में पहुंचे और उच्च शिक्षा मंत्री व विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
एक नए सरकारी पद के रूप में यह नियुक्ति, विशेषकर युवाओं के लिए, न केवल रोजगार का अवसर है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में योगदान का एक महत्वपूर्ण मौका भी है।
समारोह में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- डॉ. ए.एस. उनियाल – संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा
- डॉ. ममता नैथानी – उप निदेशक
- डॉ. प्रमोद कुमार – सहायक निदेशक
- वीरेंद्र रावत, अन्य अधिकारी
- नव नियुक्त सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष
- सभी के परिजन
समारोह में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी
नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- डॉ. ए.एस. उनियाल – संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा
- डॉ. ममता नैथानी – उप निदेशक
- डॉ. प्रमोद कुमार – सहायक निदेशक
- वीरेंद्र रावत, अन्य अधिकारी
- नव नियुक्त सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष
- सभी के परिजन
उच्च शिक्षा विभाग को मिले पाँच नए सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है।
दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती देना सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह ग्रामीण और दूरस्थ महाविद्यालयों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने पर ज़ोर दे रही है।
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