भाकियू तोमर किसानों की पंचायत में आंदोलन की घोषणा करते नेता
विकासनगर/सहसपुर। उत्तराखंड के किसानों की समस्याएँ अब एक बार फिर सड़कों पर उभरने जा रही हैं। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) गुट ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूँक दिया है। यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने घोषणा की है कि आगामी 13 दिसंबर को किसानों के विशाल जनसमूह के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
सोमवार को सहसपुर क्षेत्र के महमूद नगर शंकरपुर में अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हाजी मुस्तकीम के आवास पर हुई पंचायत में बड़ी संख्या में किसान जुटे। पंचायत में किसानों की बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और सरकार की उदासीनता को प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
सरकार पर किया सीधा हमला
राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर ने कहा कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। जहाँ उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में उचित बढ़ोतरी की, वहीं उत्तराखंड में सिर्फ 30 रुपये की मामूली वृद्धि की गई है। उन्होंने साफ कहा—
“किसान को सम्मानजनक जीवन तभी मिलेगा, जब गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल किया जाए।”
उन्होंने बताया कि चीनी मिलों द्वारा किसानों का बकाया भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे किसान भारी आर्थिक संकट झेल रहा है। किसानों की फसल मेहनत से तैयार होती है, लेकिन उसका सही मूल्य और समय से भुगतान न मिलना किसानों की आय बढ़ाने के वादों की पोल खोल देता है।
24 सूत्री मांगों के साथ कूच की तैयारी
संजीव तोमर ने बताया कि यूनियन की कुल 24 मांगें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं—
📌 प्रमुख किसान मांगें:
- गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया जाए
- किसानों का लंबित बकाया तत्काल भुगतान किया जाए
- पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों को मुफ्त कृषि यंत्र दिए जाएँ
- 60 वर्ष से ऊपर के किसानों को 10,000 रुपये मासिक पेंशन
- पहाड़ी किसानों को फसल मंडियों तक परिवहन व्यवस्था मुफ्त
- कृषि क्षेत्र को महँगाई और डीजल कीमतों से राहत
- प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को विशेष आर्थिक पैकेज
उन्होंने कहा कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा व राज्यव्यापी विरोध को नया रूप दिया जाएगा।
पंचायत में उभरी किसानों की पीड़ा
किसानों ने इस पंचायत में खुलकर अपनी समस्याएँ रखीं—
- खेतों में आवारा पशुओं का आतंक
- युवाओं का कृषि से मोहभंग
- बढ़ती उत्पादन लागत
- मौसम आपदाओं से फसल नुकसान पर उचित मुआवज़े की कमी
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फसलों के एमएसपी पर बड़े वादे करती है, लेकिन जमीन पर किसानों को राहत नहीं मिल रही।
“किसान खुशहाल होगा, तो राष्ट्र मजबूत होगा”
पंचायत में यह नारा जोरदार तरीके से उठा।
संजीव तोमर ने कहा—
“किसान सिर्फ अपने अधिकार मांग रहा है, किसी पर एहसान नहीं। जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि 13 दिसंबर को देहरादून में ऐतिहासिक एकजुटता दिखानी होगी, जिससे सरकार तक किसानों की आवाज गूँजे।
व्यापक जनसमर्थन जुटाने में जुटी यूनियन
अगले कुछ दिनों में विभिन्न गाँवों में लगातार पंचायतें होंगी। गांव-गांव जाकर किसानों को कूच के लिए तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी समर्थन जुटाने की योजना है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे किसान नेता
इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि पवन त्यागी, युवा प्रदेश अध्यक्ष अंकित चौहान, जिला अध्यक्ष संदीप चौहान, युवा जिला अध्यक्ष सलीम हसन, चंदन त्यागी, अजय त्यागी, जुल्फकार, अभिषेक राणा, जाबीर अमजद, मनोविराज सिंह, डॉ. राजेंद्र, राजकुमार कौशिक, खलील सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों का बड़ा आंदोलन बन सकता है चुनौती
राज्य के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसान संख्या में बड़ी भागीदारी दिखाते हैं, तो यह सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी।
क्योंकि—
- गन्ना किसानों की संख्या लाखों में है
- चुनावी साल करीब है
- पहाड़ी क्षेत्र के किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ रही
किसानों के इस कूच को लेकर प्रशासन भी सतर्क मोड में आ सकता है।
भाकियू तोमर का यह आंदोलन न केवल गन्ना किसानों की बल्कि पूरे कृषि समुदाय की आवाज बनने की राह पर है। 13 दिसंबर को सीएम आवास कूच कितना बड़ा रूप लेता है, इससे सरकार की नीति और किसान राज्य की भविष्य की दिशा तय हो सकती है।
किसानों का कहना है कि—
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