लक्सर रेलवे कॉलोनी के कंडम क्वार्टर पर अवैध कब्जा, अपराध का अड्डा बनी रेलवे की संपत्ति।
रेलवे, जिसे देश की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, उसकी कॉलोनियां आज सुरक्षा और राष्ट्रीय संपत्ति के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी हैं। उत्तराखंड के लक्सर जंक्शन सहित कई स्थानों पर रेलवे क्वार्टर बाहरी घुसपैठियों, चोरों और नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। इस गंभीर स्थिति ने न केवल कार्यरत रेल कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा पैदा कर दिया है, बल्कि सरकारी संपत्ति की बर्बादी को लेकर रेल विभाग की कार्रवाई पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं।
पतन की ओर रेलवे की आवासीय विरासत
भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों के लिए देशभर में आवासीय कॉलोनियों का जाल बिछाया था। ये क्वार्टर सरकारी सेवा में लगे लोगों के रहने के लिए बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ, खास तौर पर खाली पड़े और ‘कंडम’ घोषित किए गए क्वार्टर, अवैध कब्जों और अतिक्रमण का शिकार होने लगे। स्थानीय अतिक्रमणकारी और बाहरी असामाजिक तत्व इन संपत्तियों पर कब्जा जमाकर इन्हें नशाखोरी, चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि ने रेल कर्मचारियों और यात्रियों, दोनों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है।
‘कंडम कॉलोनी’ में बाहरी तत्वों का राज
उत्तराखंड के लक्सर जंक्शन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कागजों पर कॉलोनी को ‘कंडम’ घोषित कर दिया गया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है। उत्तर रेलवे के कर्मचारियों के अनुसार, अधिकांश क्वार्टर किराये पर बाहरी लोगों को सौंप दिए गए हैं, जिनमें कई संदिग्ध तत्व भी शामिल हैं।
हाल ही में, डीआरएम मुरादाबाद के आदेश पर खाली क्वार्टरों के खिड़की-दरवाजे तोड़ने की योजना थी, ताकि अवैध कब्जा रोका जा सके, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की सुस्ती के चलते यह प्लान धरातल पर नहीं उतर पाया। गोपनीय निरीक्षणों में भी क्वार्टरों के बाहर कपड़े सूखते पाए गए, जो बाहरी लोगों के स्थायी कब्जे का स्पष्ट संकेत है। लक्सर रेलवे स्टेशन के अस्पताल के पास की कॉलोनी की हालत और भी बदतर है, जहाँ चोर-उचक्के और नशेड़ी युवकों का आतंक मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि घेराबंदी न होने से अपराध बढ़ रहा है, जिससे स्टेशन का इस्तेमाल करने वाले यात्री भी असुरक्षित महसूस करते हैं।
वोटबैंक की राजनीति का आरोप
लक्सर इलाके में रेलवे की ज़मीन पर ग्रामीण क्षेत्रों के कई परिवारों ने अवैध कब्जा जमा लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये अतिक्रमणकारी भारतीय नागरिकता के दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और आयुष्मान कार्ड तक बनवाने में कामयाब रहे हैं। इस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वोटबैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रीय संपत्ति को बर्बाद करने का रास्ता साफ किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी कई नागरिकों और रेल कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई है।
चोरी से लेकर हत्या तक
इन रेलवे कॉलोनियों में आपराधिक गतिविधियाँ चरम पर हैं। शराब के नशे में मारपीट आम बात है, और ये क्वार्टर अपराधी तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। हाल ही की घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है:
- चोरों द्वारा आठ मोटरसाइकिलें रेलवे क्वार्टर से बरामद की गईं।
- इससे पहले, एक महिला की लाश भी रेलवे क्वार्टर के भीतर मिली थी।
इन गंभीर अपराधों के बावजूद, बाहरी लोगों का कब्जा अब भी बरकरार है, जिससे यह आशंका बलवती होती है कि कॉलोनियों की यह अराजक स्थिति तस्करी और अन्य संगठित अपराधों को आसान बना रही है।
वादे, सम्मेलन और शून्य एक्शन
एक ओर रेल मंत्रालय अपराध रोकने के लिए जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जहाँ ई-एफआईआर और डिजिटल साक्ष्य पर ज़ोर दिया जा रहा है, वहीं ज़मीनी स्तर पर रेल संपत्ति की सुरक्षा के प्रति अधिकारियों की सुस्ती साफ़ दिखाई देती है।
रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 140 के तहत थूकने या गंदगी फैलाने जैसे छोटे अपराधों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण जैसे बड़े अपराध पर कोई सख्ती क्यों नहीं हो रही? विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण को तुरंत हटाने का स्पष्ट आदेश दिया है, लेकिन ये कॉलोनियां अपराध के अड्डे बनी पड़ी हैं।
स्थानीय प्रभाव और मांग
स्थानीय निवासियों और रेलवे कर्मचारी यूनियन का कहना है कि ये कॉलोनियां अब ‘नो मैन’s लैंड’ बन चुकी हैं। रेलवे कर्मचारियों को हर पल अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का डर सताता रहता है। यात्री भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।लक्सर रेलवे कॉलोनी का मुद्दा राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा और सरकारी ज़मीन पर बढ़ते अवैध अतिक्रमण की गंभीर चुनौती को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल कानून-व्यवस्था के लिए, बल्कि रेल कर्मचारियों कीmorale के लिए भी घातक है। रेल विभाग को अब केवल वादे नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए, सख्त और त्वरित कार्रवाई करनी होगी। अगर राष्ट्रीय संपत्ति पर कब्ज़ा और अपराध का यह सिलसिला अब नहीं रोका गया, तो कल बहुत देर हो जाएगी।कर्मचारियों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और पीएमओ को टैग कर सोशल मीडिया पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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