“हरिद्वार में भूकम्प मॉक ड्रिल के दौरान बचाव दल और प्रशासनिक टीमें राहत अभ्यास करती हुईं”
उत्तराखंड शासन के निर्देश पर हरिद्वार जिले में भूकम्प आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 15 नवम्बर को व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। जिला प्रशासन ने विभिन्न संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर सभी संबंधित विभागों को सतर्क और सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड भौगोलिक रूप से भूकम्पीय दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। राज्य का अधिकतर हिस्सा सीस्मिक ज़ोन IV और V में आता है, जो उच्च भूकंपीय खतरे की श्रेणी है। पिछले कई दशकों में यहां कई झटके महसूस किए गए हैं और कई बार बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि भी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और प्रशिक्षित मानव संसाधन ही नुकसान को कम कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से सरकार समय-समय पर मॉक एक्सरसाइज आयोजित करती है, ताकि विभागों, राहत दलों और आम नागरिकों की तैयारी का मूल्यांकन किया जा सके।
15 नवम्बर को कहां-कहां होगी मॉक ड्रिल?
अपर जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप हरिद्वार जिले में कई स्थानों पर एक नियोजित मॉक ड्रिल आयोजित होगी। इसके तहत निम्न स्थानों को चिन्हित किया गया है:
हरिद्वार तहसील क्षेत्र
- जिला चिकित्सालय
- रेलवे स्टेशन
- शिव पुल, निकट हरकी पैड़ी
लक्सर तहसील
- शेरपुर बेला
रुड़की तहसील
- तहसील भवन
- गवर्नमेंट इंटर कॉलेज रुड़की
इन सभी स्थानों पर भूकम्प की काल्पनिक स्थिति तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर राहत एवं बचाव दल अपने-अपने SOP के अनुसार प्रतिक्रिया देंगे।
प्रशासन की तैयारी पर क्या कहा अधिकारियों ने?
अपर जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि:
“ ” (यहाँ प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक उद्धरण उपलब्ध नहीं था, इसलिए Placeholder दिया गया है)।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य संवेदनशील भूकम्पीय क्षेत्रों में आता है, इसीलिए सभी विभागों का समन्वित प्रशिक्षण आवश्यक है।
उनके अनुसार, इस मॉक एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य है:
मौके पर निर्णय क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत करना
आम जनता और विभागों पर संभावित असर
मॉक ड्रिल के दौरान कुछ स्थानों पर:
- आम लोगों के आवागमन में थोड़े समय के लिए रोक
- स्टेशन क्षेत्र में आंशिक आवाजाही नियंत्रित
- स्कूल व सरकारी कार्यालयों में डेमो और सुरक्षा अभ्यास
- ट्रैफिक में हल्का बदलाव
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मॉक ड्रिल को वास्तविक घटना न समझें और सहयोग करें। इससे भविष्य में किसी वास्तविक आपदा के समय राहत कार्य जल्दी और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे।
पहले भी हुए हैं ऐसे अभ्यास
हरिद्वार और उत्तराखंड में इससे पहले भी विभिन्न स्तरों पर मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते रहे हैं।
पिछले वर्षों में किए गए आपदा अभ्यासों से कई महत्वपूर्ण सीखें मिली थीं, जैसे:
- उच्च भीड़ वाले क्षेत्रों में निकासी में अतिरिक्त समय लगना
- मेडिकल इमरजेंसी प्रबंधन की आवश्यकता
- विभागों के बीच वायरलेस और त्वरित संचार पर ज़ोर
नई मॉक ड्रिल में इन्हीं बिंदुओं को और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। आपदा के समय विभागों के बीच तत्काल समन्वय की जांचसंसाधनों की उपलब्धता का मूल्यांकनभीड़ प्रबंधन और राहत कार्यों का अभ्यास
पहले भी हुए हैं ऐसे अभ्यास
हरिद्वार और उत्तराखंड में इससे पहले भी विभिन्न स्तरों पर मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते रहे हैं।
पिछले वर्षों में किए गए आपदा अभ्यासों से कई महत्वपूर्ण सीखें मिली थीं, जैसे:
- उच्च भीड़ वाले क्षेत्रों में निकासी में अतिरिक्त समय लगना
- मेडिकल इमरजेंसी प्रबंधन की आवश्यकता
- विभागों के बीच वायरलेस और त्वरित संचार पर ज़ोर
नई मॉक ड्रिल में इन्हीं बिंदुओं को और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।
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