“लक्सर बाल मेला 2025 में बच्चों द्वारा लगाए गए रचनात्मक स्टॉल और निरीक्षण करते अधिकारी”
लक्सर में बाल दिवस के अवसर पर रिलैक्सो द्वारा संचालित परिवर्तन आदर्श विद्यालय परियोजना और शिक्षा विभाग के सहयोग से विकासखंड स्तरीय बाल मेले का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने कला, कौशल, खेल और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
भारत में हर वर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की याद में मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित होता है। सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएँ स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती हैं, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मकता, कौशल और समाजिक मूल्यों को सीखने का अवसर मिल सके।
इसी कड़ी में लक्सर क्षेत्र में रिलैक्सो की परिवर्तन आदर्श विद्यालय परियोजना के तहत बाल दिवस पर एक विशेष बाल मेले का आयोजन किया गया।
बाल मेले का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ उपजिलाधिकारी (एसडीएम) लक्सर सौरभ असवाल ने रिबन काटकर किया। उनके साथ खंड शिक्षा अधिकारी लक्सर विनोद कुमार तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्सर के प्रभारी डॉ. सैय्यद रफ़ी अहमद मौजूद रहे।
अधिकारियों ने बच्चों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और उनकी रचनात्मकता और मेहनत की सराहना की।
बच्चों के स्टॉल और गतिविधियाँ
बाल मेले में बच्चों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और मनोरंजन से जुड़े कई रचनात्मक स्टॉल लगाए, जिनमें—
- रिंग टॉस गेम
- हाइजीन और जेंडर अवेयरनेस स्टॉल
- पोषण थीम आधारित मॉडल
- लाइफ स्किल्स गेम जोन
- खाद्य पदार्थ और खिलौनों के स्टॉल
इसके अतिरिक्त बच्चों ने मंच पर नृत्य, गीत, और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बच्चों की उत्सुकता और सहभागिता देखते ही बनती थी।
अन्य स्थानों पर भी हुआ आयोजन
रिलैक्सो की CSR परियोजना के अंतर्गत लालचंदवाला और मुण्डाखेड़ा कला में भी बाल मेले का आयोजन किया गया।
दोनों जगह बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और कई नवाचारपूर्ण मॉडेल व गतिविधियाँ प्रस्तुत कीं।
CSR टीम की ओर से कहा गया कि इस तरह के आयोजनों से ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के बच्चों को अपनी योग्यता दिखाने का मंच मिलता है।
लक्सर और आसपास के क्षेत्रों में बाल मेले के आयोजन का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला।
- अभिभावकों ने बच्चों की प्रतिभा को देखकर खुशी व्यक्त की।
- कई शिक्षकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्कूलों में पढ़ाई को और बेहतर बनाते हैं।
- बच्चों में टीम वर्क, नेतृत्व, और सामाजिक जागरूकता जैसे गुणों का विकास हुआ।
- स्थानीय समुदाय में शिक्षा के प्रति रुचि और सक्रियता भी बढ़ी।
इस प्रकार बाल दिवस को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए एक शिक्षाप्रद अवसर में बदल दिया गया।
बीते वर्षों में बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम सामान्यतः सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित रहते थे, लेकिन इस वर्ष परियोजना के तहत बच्चों की कौशल विकास आधारित गतिविधियों को अधिक महत्व दिया गया।
- पिछले वर्ष बाल मेले में लगभग “” स्टॉल लगे थे, जबकि इस वर्ष संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
- प्रतिभाग करने वाले बच्चों की संख्या भी “” प्रतिशत तक बढ़ी।
- CSR और शिक्षा विभाग की साझेदारी से गुणवत्ता आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
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लक्सर में आयोजित बाल मेला बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और सीखने की क्षमता का जीवंत उदाहरण बना। बाल दिवस पर ऐसा आयोजन न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ाता है बल्कि समाज को भी यह संदेश देता है कि शिक्षा पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को सीखने का माध्यम है।
रिलैक्सो और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह कार्यक्रम आने वाले वर्षों में भी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा।
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