“विश्व निमोनिया दिवस पर गोपेश्वर जिला अस्पताल में माताओं को जागरूक करते स्वास्थ्य अधिकारी।”
चमोली में विश्व निमोनिया दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने माताओं और तीमारदारों को निमोनिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी और बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व पर जोर दिया।
विश्व निमोनिया दिवस का उद्देश्य
हर वर्ष 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस (World Pneumonia Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस गंभीर संक्रमण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, जो दुनिया भर में लाखों बच्चों की जान लेता है। इस वर्ष की थीम “चाइल्ड सर्वाइवल” (Child Survival) रखी गई है, जो बच्चों को निमोनिया से बचाने और जीवनरक्षा के उपायों पर केंद्रित है।
भारत में निमोनिया बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन यह रोग टीकाकरण, पोषण और स्वच्छता के जरिये रोका जा सकता है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सर्दी के मौसम में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं, इसलिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
गोपेश्वर जिला अस्पताल में कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अभिषेक गुप्ता के निर्देश पर प्रसवोत्तर टीकाकरण केंद्र (PPC) में किया गया।
जिला स्वास्थ्य सूचना, शिक्षा एवं संचार प्रबंधक उदय सिंह रावत ने उपस्थित माताओं और तीमारदारों को संबोधित करते हुए बताया कि—
“निमोनिया एक फेफड़ों का संक्रमण है जो छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। समय पर टीकाकरण, स्वच्छ वायु और धुएं से बचाव इस बीमारी से बचने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।”
उन्होंने बताया कि तेज सांस चलना, छाती में खिंचाव या बुखार जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि “हर सांस महत्वपूर्ण है” (Every Breath Counts) — यह नारा केवल एक थीम नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की जिम्मेदारी है।
CMO कार्यालय की ओर से कहा गया कि जनसामान्य को बच्चों का पूर्ण टीकाकरण, धुएं से बचाव, और हाथों की नियमित सफाई को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
“हम सभी का दायित्व है कि अपने आसपास के लोगों को जागरूक करें ताकि कोई भी बच्चा निमोनिया की चपेट में न आए।” — उदय सिंह रावत, जिला IEC प्रबंधक
जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में माताओं को स्वास्थ्य शिक्षा देना था।
गोपेश्वर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड के मौसम में बच्चे निमोनिया के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
कार्यक्रम में शामिल माताओं ने वादा किया कि वे अपने गांवों में जाकर दूसरों को भी टीकाकरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगी।
भारत में निमोनिया की स्थिति
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर वर्ष 5 वर्ष से कम आयु के करीब 1.7 लाख बच्चे निमोनिया से प्रभावित होते हैं।
हालांकि, सरकार के “इंद्रधनुष टीकाकरण अभियान” और प्न्युमोकोकल वैक्सीन (PCV) के प्रसार से मृत्यु दर में कमी आई है।
उत्तराखंड में भी पिछले तीन वर्षों में इस बीमारी से संबंधित मामलों में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई है।
हर सांस की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी
निमोनिया पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है, बशर्ते लोग समय पर टीकाकरण और स्वच्छता के नियमों का पालन करें।
इस अवसर पर स्वास्थ्यकर्मियों ने सभी से अपील की कि वे इस अभियान को जनआंदोलन बनाएं और बच्चों की हर सांस की सुरक्षा के लिए मिलकर प्रयास करें।
यह भी पढ़ें–शहीदों के नाम पर स्कूल और सड़कों का नामकरण, जनभावनाओं से जुड़ा विषय: डीएम गौरव कुमार
