चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार शहीदों के नाम पर नामकरण प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए बैठक में निर्देश देते हुए।
चमोली में जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में जनपद के स्कूलों, सरकारी संस्थानों और सड़कों का नामकरण अमर शहीदों के नाम पर किए जाने को लेकर अहम निर्णय लिए गए। डीएम ने कहा कि यह कदम न केवल सम्मान का प्रतीक है बल्कि जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ विषय भी है।
शहीदों के सम्मान में नामकरण की परंपरा
भारत में शहीदों के नाम पर संस्थानों और सड़कों का नामकरण एक सम्मानजनक परंपरा रही है। यह न केवल राष्ट्र के प्रति उनके योगदान की याद दिलाता है, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति और सेवा की भावना से भी प्रेरित करता है।
उत्तराखंड, जो वीरभूमि के नाम से जाना जाता है, ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक समय तक अनेक वीरों को जन्म दिया है। ऐसे में चमोली जिले का यह निर्णय शहीदों की स्मृति को जीवित रखने की दिशा में सराहनीय पहल मानी जा रही है।
डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक
जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को यह बैठक आयोजित हुई, जिसमें जनपद के विभिन्न सरकारी संस्थानों, स्कूलों और सड़कों का नामकरण अमर शहीदों के नाम पर करने के प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
डीएम ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि नामकरण प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और स्थानीय जनभावनाओं के अनुरूप प्रस्ताव शीघ्र भेजे जाएं। उन्होंने कहा,
“शहीदों के नाम पर नामकरण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि जनपदवासियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ सम्मान का विषय है।”
महत्वपूर्ण सड़कों और संस्थानों का नामकरण प्रस्ताव
बैठक में कई प्रमुख मार्गों और संस्थानों का नामकरण शहीदों के नाम पर करने के प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
- गोपेश्वर–मंडल मोटर मार्ग का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मेहरबान सिंह रावत के नाम पर किया जाएगा।
- राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय आलम सिंह फरस्वाण के नाम पर रखा जाएगा।
- ल्वाणी–सुया मोटर मार्ग (देवाल ब्लॉक) का नाम स्वर्गीय खीम सिंह के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया गया है।
- नैनीसैण–कालूसैण–आमसौड़ मार्ग (कर्णप्रयाग क्षेत्र) को स्वर्गीय तुलाराम थपलियाल के नाम से जोड़ा जाएगा।
डीएम ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया कि नामकरण से जुड़ी फाइलें प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित की जाएं ताकि मुख्यमंत्री घोषणाओं के अनुरूप कार्य समय पर पूर्ण हो सकें।
डीएम गौरव कुमार के निर्देश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा,
“यह पहल शहीदों के त्याग को अमर बनाने और युवाओं में प्रेरणा जगाने के उद्देश्य से की जा रही है। जनपद के हर ब्लॉक में ऐसे नामकरण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि एसडीएम और संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नामकरण प्रक्रिया में स्थानीय जनभावनाओं का पूर्ण सम्मान हो।
डीएम ने संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से जुड़ी परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा किया जाए।
बैठक में शामिल अधिकारी और जनप्रतिनिधि
बैठक में भाजपा प्रदेश महामंत्री विनोद कनवासी, विधायक प्रतिनिधि अरविंद नेगी, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ, सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी कलाम सिंह, और एई पीडब्ल्यूडी उमेश धारिया सहित सभी उपजिलाधिकारी व संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक प्रेरणा
शहीदों के नाम पर नामकरण से न केवल स्थानीय लोगों में गौरव की भावना बढ़ेगी, बल्कि स्कूलों के विद्यार्थी भी अपने क्षेत्र के वीरों से प्रेरणा लेंगे।
ऐसे कदम समाज में देशभक्ति की भावना को गहरा करते हैं और युवाओं को राष्ट्रसेवा की ओर प्रेरित करते हैं।
स्थानीय जनता का कहना है कि इससे “शहीदों की याद जीवित रहेगी और आने वाली पीढ़ियाँ उनके बलिदान को याद रखेंगी।”
अन्य जिलों में भी चल रही है पहल
उत्तराखंड के अन्य जिलों — जैसे पौड़ी, अल्मोड़ा और टिहरी — में भी इसी तरह शहीदों के नाम पर मार्ग और संस्थानों का नामकरण किया जा रहा है।
यह कदम राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत स्थानीय नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सम्मान देने के लिए प्रत्येक जनपद में नामकरण अभियान चलाया जा रहा है।
यह नीति न केवल प्रशासनिक रूप से सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करती है।
सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक
चमोली में शहीदों के नाम पर नामकरण का यह अभियान जिले के नागरिकों और युवाओं के लिए गर्व का विषय है।
डीएम गौरव कुमार की यह पहल उन शहीदों को अमर श्रद्धांजलि है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
“यह केवल नाम बदलने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनपद के इतिहास और सम्मान को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।”
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