“अग्निवीर योजना के विरोध में बयान देते पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा।”
बागेश्वर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निवीर भर्ती योजना के ज़रिए सरकार ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है।
अग्निवीर योजना और विवाद की जड़
वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सेना में भर्ती किया जाता है। सरकार का दावा था कि इससे सैन्य बलों में युवाओं की ऊर्जा और अनुशासन बढ़ेगा, जबकि विपक्ष का आरोप रहा है कि यह व्यवस्था सेना की स्थायित्व और मनोबल को प्रभावित करती है।
प्रदीप टम्टा सहित कई विपक्षी नेता इस योजना को “सेना का निजीकरण” बताकर लगातार विरोध कर रहे हैं।
प्रेस वार्ता में उठे गंभीर सवाल
बुधवार को बागेश्वर जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में टम्टा ने कहा कि भाजपा सरकार देश की सेना की परंपरागत ताकत को कमज़ोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि—
“अग्निवीर भर्ती कर भाजपा सरकार ने भारत की सुरक्षा पर खिलवाड़ किया है। कुमाऊं और गढ़वाल रेजीमेंट जैसी गौरवशाली परंपराओं को खत्म करने की साजिश चल रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हल्द्वानी दौरे के दौरान पूर्व सैनिकों को सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से बुलाया गया, जो कांग्रेस के अनुसार अनुचित है।
टम्टा ने मांग की कि अगर यह कार्यक्रम राजनीतिक है, तो सैनिकों को भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के माध्यम से बुलाया जाना चाहिए था, ताकि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग न हो।
कांग्रेस की आपत्ति और प्रतिक्रिया
कांग्रेस जिलाध्यक्ष भगवत डसीला, लोकमणि पाठक और सुनील भंडारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए पूर्व सैनिकों को भ्रमित कर रही है, जो सेना की गरिमा के खिलाफ है।
“उत्तराखंड ऐसा राज्य है, जहां हर घर से एक जवान देश की सेवा करता है। भाजपा इस भावना को कमजोर करने का काम कर रही है।”
सैनिक परिवारों में बढ़ी नाराजगी
बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में बड़ी संख्या में सैनिक परिवार रहते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अग्निवीर योजना ने युवा भर्ती के सपनों को झटका दिया है।
कई युवाओं का कहना है कि चार साल की नौकरी और पेंशन का न मिलना उनके भविष्य को अनिश्चितता में डालता है।
हालांकि भाजपा नेताओं का तर्क है कि यह योजना आधुनिक सेना की जरूरतों के अनुरूप है और युवाओं को अनुशासन व कौशल प्रदान करेगी।
पुरानी भर्ती व्यवस्था बनाम नई योजना
पहले की भर्ती प्रक्रिया में जवानों को 15 से 17 साल की नियमित सेवा, पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलती थीं।
अब अग्निवीर योजना के तहत चार साल की सेवा के बाद केवल 25% युवाओं को स्थायी किया जाता है, जबकि बाकी 75% को सेवा समाप्ति के बाद 11.7 लाख रुपये की सेवा निधि दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से अनुभवी सैनिकों की संख्या घटेगी और यह राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र पर असर डाल सकती है।
उत्तराखंड में बड़ा चुनावी मुद्दा बनती योजना
उत्तराखंड में जहां लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में सेवा देता है, वहीं अग्निवीर योजना अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।
कांग्रेस इसे युवाओं के साथ धोखा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बता रही है, जबकि भाजपा इसे युवाओं को अवसर देने वाली क्रांतिकारी पहल के रूप में पेश कर रही है।
सुरक्षा और सम्मान दोनों का सवाल
प्रदीप टम्टा का बयान यह स्पष्ट करता है कि अग्निवीर योजना को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है।
जहां एक ओर सरकार इसे आधुनिकीकरण का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सैन्य ढांचे की कमजोरी के रूप में देख रहा है।
आगामी महीनों में यह मुद्दा न केवल सियासी बहस का केंद्र बनेगा, बल्कि देश की रक्षा नीति के भविष्य को भी प्रभावित करेगा।
यह भी पढ़ें–हरिद्वार में शुरू हुआ विशेष स्वच्छता सप्ताह अभियान 2025…
