मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून स्थित गौशाला में गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौमाता की पूजा करते हुए।
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास स्थित गौशाला में गौमाता की पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि मनुष्यों और पशुओं के बीच गहरे संबंध का प्रतीक भी है।
गोवर्धन पूजा और सनातन संस्कृति में इसका महत्व
गोवर्धन पूजा, दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा से जुड़ा है। यह पर्व कृषि, पर्यावरण और गौ-सेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में यह पर्व विशेष रूप से ग्रामीण और कृषक समुदायों द्वारा बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है, क्योंकि यह प्रकृति, जीव-जंतु और मानव के बीच संतुलन की भावना को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने की गौमाता की पूजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित गौशाला में गोवर्धन पूजा के अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की खुशहाली, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
उन्होंने कहा कि —
“गोवर्धन पूजा हमें अपनी परंपराओं, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बने रहने का संदेश देती है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, मनुष्यों एवं जानवरों के बीच के प्रेम को दर्शाता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और वह सनातन संस्कृति तथा कृषि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
“गौ सेवा, आत्मनिर्भरता और संस्कृति का संगम”
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गौमाता की सेवा और संरक्षण हमारे जीवन को आगे बढ़ाने वाला कार्य है।
उन्होंने बताया कि कई परिवारों की आजीविका गाय पालन और गो-सेवा से जुड़ी हुई है। इसीलिए गौ-संवर्धन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“राज्य सरकार गौ संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। निराश्रित पशुओं की देखभाल हेतु राज्यभर में गौ सदनों का निर्माण किया जा रहा है।”
बढ़ाई गई आर्थिक सहायता और नई नीतियाँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले जहाँ निराश्रित पशुओं के भरण-पोषण के लिए 5 रुपए प्रति दिन प्रति पशु दिए जाते थे, अब इस राशि को बढ़ाकर 80 रुपए प्रति पशु प्रतिदिन कर दिया गया है।
इसके अलावा, निजी रूप से गौशालाओं के निर्माण में 60% सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है।
फिलहाल राज्य में लगभग 54 गौ सदनों का निर्माण कार्य जारी है, जिनके पूरा होने पर हजारों निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
राज्य सरकार के इन कदमों से न केवल गौ संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, जैविक खेती और गोबर से उर्जा उत्पादन जैसे कार्यों में भी वृद्धि की उम्मीद है।
गौ आधारित आजीविका से जुड़े किसान और पशुपालक समुदाय इस पहल से लाभान्वित होंगे।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड सरकार ने गौसंवर्धन पर कई नीतिगत निर्णय लिए हैं।
के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में गौशालाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और राज्य में पशु अब पंजीकृत गौशालाओं में संरक्षित हैं।
मुख्यमंत्री धामी द्वारा गौमाता की पूजा और उनके संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदम राज्य की संस्कृति और स्थायी विकास मॉडल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
गोवर्धन पूजा के इस अवसर पर मुख्यमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि प्रकृति, पशु और मानव के बीच सामंजस्य ही समृद्ध समाज की नींव है।
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