“हरिद्वार साइबर सेल टीम द्वारा साइबर अपराध जागरूकता अभियान के तहत नागरिकों को जानकारी देते पुलिसकर्मी।”
साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती
डिजिटल युग में इंटरनेट ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। बैंक फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक और सोशल मीडिया स्कैम जैसी घटनाओं ने आम नागरिकों को मुश्किल में डाल दिया है। के अनुसार, उत्तराखंड में बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
हरिद्वार पुलिस की जागरूकता पहल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देशन में साइबर सेल टीम ने शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्रों और ऑटो स्टैंड्स पर जाकर आम जनता से संवाद किया।
टीम ने ऑटो रिक्शा चालकों को बताया कि यदि कोई संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड या डिजिटल भुगतान के बहाने पैसे मांगता है तो तुरंत सतर्क रहें और पुलिस की हेल्पलाइन पर सूचना दें।
इसके साथ ही यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को भी बताया गया कि ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग या सोशल मीडिया पर किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें। इस अवसर पर पंपलेट्स वितरित किए गए और साइबर अपराध से बचाव संबंधी पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाए गए।
अधिकारिक बयान
साइबर सेल हरिद्वार की ओर से जारी बयान में कहा गया —
“जनता को साइबर अपराधों से बचाने के लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य हर नागरिक को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाना है।”
स्थानीय स्तर पर असर
यह पहल हरिद्वार के नागरिकों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। स्थानीय व्यापारियों और ऑटो चालकों ने पुलिस की इस मुहिम की सराहना की। लोगों ने बताया कि उन्हें अब यह समझ में आ रहा है कि अज्ञात नंबरों से आने वाले कॉल या लिंक कितने खतरनाक हो सकते हैं।
यात्री वर्ग में भी इस अभियान को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इससे साइबर अपराध के प्रति सतर्कता बढ़ी है और कई लोगों ने अपनी डिजिटल सुरक्षा सेटिंग्स को अपडेट किया है।
पुरानी घटनाओं से तुलना
पिछले वर्ष हरिद्वार और रुड़की क्षेत्रों में कई लोगों से ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और फर्जी लिंक के जरिए लाखों रुपये की ठगी की गई थी।
के मुताबिक, 2024 में हरिद्वार जनपद में साइबर ठगी के लगभग मामले दर्ज हुए थे। ऐसे में यह अभियान नागरिकों को भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
जनजागरूकता के लिए पुलिस की रणनीति
हरिद्वार पुलिस अब इस अभियान को गांवों, स्कूलों और कॉलेजों तक भी पहुंचाने की तैयारी में है। साइबर सेल की योजना है कि युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों दोनों को अलग-अलग सेगमेंट में डिजिटल साक्षरता के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।
साथ ही, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से भी साइबर सुरक्षा संदेश साझा किए जा रहे हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
हरिद्वार पुलिस की यह पहल डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक सराहनीय कदम है। आम नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ईमेल पर भरोसा न करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।
इस तरह की जागरूकता ही हमें डिजिटल युग के खतरों से बचा सकती है।
