उत्तराखंड एआई इम्पैक्ट समिट 2025 में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और अतिथिगण देहरादून में कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए।
देहरादून में शुक्रवार को आयोजित उत्तराखंड एआई इम्पैक्ट समिट 2025 में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि “एआई (Artificial Intelligence) इस सदी की परमाणु तकनीक के समान है, लेकिन भारत इसे सबके लिए सुलभ बनाने के प्रयास में जुटा है।”
यह आयोजन भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की प्री-समिट के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के अग्रणी शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों ने भाग लिया।
भारत में एआई का बढ़ता प्रभाव
भारत ने पिछले एक दशक में डिजिटल नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। इंडिया-एआई मिशन के तहत सरकार “AI for All” की नीति पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य तकनीक को जन-सेवा, शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में पहुँचाना है।
उत्तराखंड ने भी इस दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिनमें ड्रोन एप्लिकेशन सेंटर और एआई एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना शामिल है।
देहरादून में हुआ तकनीक का संगम
यह कार्यक्रम 17 अक्टूबर 2025 को देहरादून के होटल रमाडा में आयोजित हुआ। आयोजन उत्तराखंड सरकार के आईटी विभाग और भारत एआई मिशन (MeitY) के सहयोग से किया गया।
इस अवसर पर प्रमुख अतिथियों में –
- नितेश कुमार झा (आईटी सचिव, उत्तराखंड)
- मोहम्मद वाई सफिरुल्ला (निदेशक, भारत एआई मिशन)
- डॉ. दुर्गेश पंत (महानिदेशक, यूसीओएसटी)
- प्रो. राम शर्मा (कुलपति, यूपीईएस, देहरादून)
- श्रीमती शर्मिष्ठा दास (डीडीजी, एआई डिवीजन, एनआईसी मुख्यालय)
उपस्थित रहे।
“भारत तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन रहा है”
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा —
“पिछली सदी में जो महत्व परमाणु तकनीक का था, वही आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है। फर्क इतना है कि इस बार भारत सभी को समान अवसर देने की दिशा में अग्रसर है। हम एक डॉलर प्रति घंटे से भी कम लागत में विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति उपलब्ध करा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि एआई अब शासन, शिक्षा और प्रशासन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन चुका है।
उत्तराखंड के आईटी सचिव नितेश कुमार झा ने बताया —
“हम सिर्फ एआई का उपयोग नहीं कर रहे, बल्कि उसका निर्माण भी कर रहे हैं। हमारे राज्य ने ड्रोन तकनीक और एआई के एकीकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किया है।”
एआई से रोजगार और नवाचार को नई दिशा
देहरादून और उत्तराखंड में इस आयोजन के बाद स्टार्टअप इकोसिस्टम को बल मिला है।
IIT रुड़की, IIM काशीपुर, UPES, STPI देहरादून और टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल चेंज जैसे संस्थानों ने एआई-आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।
इससे स्थानीय युवाओं को शोध, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
एआई निवेश और भारत की प्रगति
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच भारत में एआई-आधारित स्टार्टअप्स की संख्या 65% बढ़ी है।
भारत अब एशिया का तीसरा सबसे बड़ा एआई बाजार बन चुका है।
उत्तराखंड भी शिक्षा और नवाचार में इस विकास का लाभ उठा रहा है।
युवाओं को प्रेरित करने पर जोर
टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट के विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता में पैनल चर्चा हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने एआई को रचनात्मक सोच और समस्या समाधान के साधन के रूप में प्रस्तुत किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के युवा यदि एआई के “निर्माता” बनें तो देश वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में उभर सकता है।
भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारी
उत्तराखंड में हुआ यह आयोजन फरवरी 2026 में होने वाले भारत-एआई इम्पैक्ट समिट का मंच तैयार करता है।
यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला वैश्विक एआई फोरम होगा, जो समानता, टिकाऊपन और समावेशी एआई विकास पर केंद्रित रहेगा।
यह पहल भारत को जन-केंद्रित तकनीकी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एआई से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
देहरादून में हुआ यह समिट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रतीक है।
एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग से न केवल शासन और शिक्षा में सुधार होगा, बल्कि भारत एक नवाचार-प्रधान और जनहितकारी तकनीकी महाशक्ति के रूप में उभरेगा।
