मुंबई पुलिस की गिरफ्त में बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर गुरु मां, फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रही थी भारत में
मुंबई पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बांग्लादेशी ट्रांसजेंडर को गिरफ्तार किया है, जो ‘गुरु मां’ के नाम से मशहूर थी और पिछले 30 वर्षों से फर्जी भारतीय दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रही थी। आरोपी के खिलाफ मुंबई के कई थानों में आपराधिक मामले दर्ज हैं।
फर्जी दस्तावेजों पर दशकों से सक्रिय नेटवर्क
मुंबई में लंबे समय से अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। कई बार ट्रांसजेंडर समुदाय के नाम पर फर्जी पहचान बनाकर कुछ लोग भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। ‘गुरु मां’ का मामला भी इसी पैटर्न का एक बड़ा उदाहरण है।
मार्च 2025 में शिवाजी नगर पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी ट्रांसजेंडरों के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसके दौरान ज्योति नामक एक ट्रांसजेंडर को भी हिरासत में लिया गया था। उस समय उसके पास भारतीय आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मौजूद थे, जिसके कारण पुलिस ने उसे छोड़ दिया था।
कैसे खुली गुरु मां की पोल
पुलिस ने बाद में उसके दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि सभी दस्तावेज फर्जी थे।
आरोपी का असली नाम बाबू अयान खान है, जिसने खुद को वर्षों से ‘ज्योति उर्फ गुरु मां’ के रूप में पेश किया था।
मुंबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पासपोर्ट अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
जांच में यह भी सामने आया कि गुरु मां के मुंबई में करीब 20 से अधिक घर हैं और वह लगभग 300 अनुयायियों (फॉलोअर्स) की नेता थी। वह मुख्य रूप से गोवंडी, रफीक नगर, देवनार और कुर्ला जैसे इलाकों में सक्रिय थी।
(अधिकारिक बयान)
पुलिस अधिकारियों के अनुसार,
“अधिकारियों ने बताया कि यह गिरफ्तारी उन सभी के लिए चेतावनी है जो फर्जी पहचान पत्र बनाकर भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी दस्तावेज किस माध्यम से और किन लोगों की मदद से तैयार किए गए थे।
मुंबई में बढ़ी सतर्कता, अवैध निवासियों पर शिकंजा
मुंबई के ट्रांसजेंडर समुदाय और अन्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के बीच इस कार्रवाई के बाद हलचल मच गई है।
शहर में विदेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को लेकर पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों से समुदाय की छवि पर असर पड़ता है, जबकि असली ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता इससे अलग सामाजिक कार्यों में लगे हैं।
अवैध निवासियों पर बढ़ती कार्रवाई
पिछले दो वर्षों में मुंबई पुलिस और गृह मंत्रालय की संयुक्त कार्रवाई में 200 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को देश से निर्वासित किया गया है।
2024 में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई क्षेत्रों में बांग्लादेशी मूल के लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों से पहचान बनाने के 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे।
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और इसे तोड़ने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
अवैध निवासियों पर बढ़ती कार्रवाई
पिछले दो वर्षों में मुंबई पुलिस और गृह मंत्रालय की संयुक्त कार्रवाई में 200 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को देश से निर्वासित किया गया है।
2024 में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई क्षेत्रों में बांग्लादेशी मूल के लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों से पहचान बनाने के 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे।
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और इसे तोड़ने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
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