“हरकी पौड़ी घाट पर गंगा सफाई अभियान और लगाए गए सीसीटीवी कैमरे का दृश्य”
गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए हरिद्वार जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) आकांक्षा कोण्डे की अध्यक्षता में हुई जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में गंगा और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसमें जिले के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, पुलों पर जाली लगाने और प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने पर विशेष बल दिया गया।
गंगा संरक्षण की पृष्ठभूमि
गंगा नदी भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। हरिद्वार जैसे तीर्थस्थल में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन और स्नान के लिए आते हैं। यह धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है। हालांकि, लगातार बढ़ते प्रदूषण, अनियंत्रित अतिक्रमण और अपशिष्ट जल के कारण गंगा की स्वच्छता को लेकर कई बार चिंता जताई जाती रही है। नमामि गंगे जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई जरूरी मानी जाती है।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक के दौरान सीडीओ आकांक्षा कोण्डे ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि जनपद में संचालित सभी एसटीपी पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। इससे गंदे पानी के शोधन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
उन्होंने हरकी पौड़ी, भीमगोड़ा, चमगादड़ टापू, कांवड़ पटरी मार्ग, आस्था पथ, दूधियाबंध और दक्षिण काली मंदिर के आसपास हुए अतिक्रमण को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई नगर निगम, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) और सिंचाई विभाग के संयुक्त तत्वावधान में की जाएगी।
इसके साथ ही, गंगा को दूषित होने से बचाने के लिए हरकी पौड़ी सहित सभी प्रमुख पुलों पर जाली लगाने का कार्य तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया।
विशेष स्वच्छता अभियान की तैयारी
सीडीओ ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान गंगा घाटों, कांवड़ मार्ग और आसपास के इलाकों में सफाई अभियान के साथ जन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
अधिकारियों और विशेषज्ञों की भागीदारी
बैठक में मुख्य नगर आयुक्त नंदन कुमार, जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह नेगी, अभियंता जल संस्थान (गंगा) हरीश बंसल, जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी, प्रोजेक्ट मैनेजर (नमामि गंगे) मीनाक्षी मित्तल और आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत सहित गंगा समिति के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
स्थानीय प्रभाव
इन निर्देशों का सीधा असर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और निवासियों पर पड़ेगा। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से गंदगी फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई संभव होगी, जबकि अतिक्रमण हटाने से घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा बेहतर होगी। पुलों पर जाली लगाने से गंगा में कचरा और अन्य अपशिष्ट फेंकने की घटनाओं पर रोक लग सकेगी।
आंकड़ों और पिछली कार्रवाइयों से तुलना
पिछले कुछ वर्षों में हरिद्वार में गंगा सफाई के कई प्रयास किए गए हैं। नमामि गंगे के तहत टन कचरा प्रतिवर्ष हटाया जा रहा है। हालांकि, सीसीटीवी निगरानी और बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने जैसी पहल पहली बार इतने संगठित तरीके से की जा रही है। इससे गंगा संरक्षण को स्थायी आधार मिलने की उम्मीद है।
हरिद्वार प्रशासन की यह पहल गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जनता को भी चाहिए कि वे गंगा की पवित्रता बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को अपशिष्ट जल और कचरा गंगा में न डालने की सख्त हिदायत दी जा रही है। स्वच्छ और निर्मल गंगा ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए सच्ची धरोहर साबित होगी।
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