कांवड़ मेले के बाद हरिद्वार में स्वयंसेवकों द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान और ज्वालापुर कोतवाली में पुलिस कार्रवाई
कांवड़ मेले के सफल समापन के बाद हरिद्वार में व्यापक स्तर पर स्वच्छता की नई मिसाल देखने को मिली। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में नगर निगम हरिद्वार एवं जिला प्रशासन ने शहर को पुनः स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से वृहद स्वच्छता अभियान प्रारंभ किया। इस अभियान में सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे जनआंदोलन का रूप दे दिया।
16 फरवरी 2026 को चमगादड़ टापू क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। यह अभियान शांतिकुंज के सहयोग से सेनेटरी इंस्पेक्टर धीरेन्द्र सेमवाल के नेतृत्व में संचालित हुआ। लगभग 200 स्वयंसेवकों ने श्रमदान करते हुए कांवड़ यात्रियों द्वारा छोड़े गए प्लास्टिक, कपड़े, पूजन सामग्री और अन्य अपशिष्ट को एकत्रित किया। इस क्षेत्र से कुल 8 टन कचरा एकत्र कर वैज्ञानिक पद्धति से निस्तारण के लिए भेजा गया।
चमगादड़ टापू जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमा अपशिष्ट पर्यावरण के लिए चुनौती बन सकता था। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर न केवल सफाई सुनिश्चित की, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धार्मिक आयोजनों के बाद पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी क्रम में रोड़ी बेलवाला क्षेत्र में भी व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। यहां मुख्य सेनेटरी इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह के नेतृत्व में पतंजलि योगपीठ के 80 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विद्यार्थियों ने श्रमदान करते हुए लगभग 4 टन कचरा एकत्रित किया। युवाओं की यह सहभागिता स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बनी।
नगर निगम हरिद्वार ने अभियान में सहयोग देने वाले सभी स्वयंसेवकों, संस्थाओं और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। प्रशासन ने इसे “स्वच्छ हरिद्वार – स्वस्थ हरिद्वार” अभियान की दिशा में सशक्त पहल बताया। अधिकारियों का कहना है कि जनसहभागिता, प्रशासनिक सक्रियता और संस्थागत सहयोग के समन्वय से ही ऐसे बड़े आयोजनों के बाद शहर को शीघ्र सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है।
कांवड़ मेला हरिद्वार की आस्था, पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के कारण स्वच्छता और यातायात व्यवस्था बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में मेले के उपरांत व्यापक सफाई अभियान चलाना प्रशासन की जिम्मेदारी के साथ-साथ सामाजिक दायित्व भी है।
इस अभियान के दौरान एकत्रित कचरे को वैज्ञानिक विधि से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर निस्तारित किया गया। प्लास्टिक, जैविक और अन्य अपशिष्ट को पृथक कर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई गई। इससे न केवल शहर की स्वच्छता बहाल हुई, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाया गया।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना है कि यदि इसी प्रकार सामूहिक प्रयास जारी रहे तो हरिद्वार को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना संभव है। कई स्वयंसेवकों ने भविष्य में भी ऐसे अभियानों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।
स्वच्छता अभियान के साथ-साथ कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय रहा। कोतवाली ज्वालापुर क्षेत्र में 13 फरवरी 2026 को दो पक्षों के बीच हुए आपसी विवाद के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर अभियोग पंजीकृत किए गए थे।
14 फरवरी को दोनों पक्षों को बयान हेतु थाने बुलाया गया। बयान के दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिसकर्मियों द्वारा समझाने के बावजूद दोनों पक्ष उग्र होकर शांति व्यवस्था भंग करने लगे। परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने धारा 170 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत कार्रवाई की।
इस प्रकरण में सैफ पुत्र ईनाम, सुहैल पुत्र इमरान और फईम पुत्र नईम अहमद निवासी ज्वालापुर क्षेत्र के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की गई। कार्रवाई करने वाली टीम में उप निरीक्षक मनीष भंडारी, हेड कांस्टेबल अनिल भट्ट और कांस्टेबल विक्रम तोमर शामिल रहे।
हरिद्वार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। धार्मिक आयोजनों के बाद शहर में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो एक ओर जहां स्वच्छता अभियान ने पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत किया, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई ने कानून व्यवस्था के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाया। हरिद्वार में प्रशासनिक तत्परता, सामाजिक सहयोग और पुलिस की सक्रियता का यह समन्वय आने वाले आयोजनों के लिए सकारात्मक संकेत है।
“स्वच्छ हरिद्वार – स्वस्थ हरिद्वार” का संदेश केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सतत प्रक्रिया है। यदि नागरिक, संस्थाएं और प्रशासन मिलकर इसी प्रकार प्रयास करते रहें, तो हरिद्वार को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से संतुलित बनाए रखना संभव होगा।
